NEET UG 2026 री-एग्जाम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जहां पेपर लीक मामले में जेल में बंद एक आरोपी छात्र को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलने से बहस तेज हो गई है। दिल्ली की अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपी छात्र यश यादव, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है, 21 जून 2026 को होने वाली NEET री-एग्जाम की तैयारी जेल में रहकर कर सकता है। इस फैसले के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
जेल में किताबों के साथ तैयारी की छूट, परीक्षा में बैठने पर सवाल कायम
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश अजय गुप्ता ने यह सवाल उठाया कि क्या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आरोपी को परीक्षा में बैठने की अनुमति देती है या नहीं। इस पर बचाव पक्ष की ओर से बताया गया कि यश यादव ने 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा में भाग लिया था, इसलिए वह नियमों के तहत 21 जून को होने वाली री-एग्जाम में शामिल हो सकता है।
इसके बाद अदालत ने जेल प्रशासन को आदेश दिया कि आरोपी को परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक किताबें उपलब्ध कराई जाएं। इस फैसले के तहत यश यादव को जेल के भीतर ही पढ़ाई करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, इस निर्णय पर विभिन्न कानूनी विशेषज्ञों और अभिभावकों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है।
सीबीआई जांच में सामने आया करोड़ों का नेटवर्क, 13 लोग गिरफ्तार
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है, जिसमें अब तक कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, सबसे पहले प्रश्नपत्र यश यादव तक पहुंचा, जिसके बाद इसे आगे बेचा गया। आरोप है कि शुभम खैरनार ने यश से पेपर हासिल किया, जिसे बाद में मंगीलाल बिवाल तक पहुंचाया गया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पेपर की कीमत लगभग 10 लाख रुपये तय की गई थी, जिसे आगे 12 लाख रुपये तक में छात्रों को बेचा गया। यह पूरा नेटवर्क राजस्थान के सीकर सहित कई राज्यों तक फैला हुआ बताया जा रहा है। अब तक इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी न्यायिक हिरासत में हैं।
21 जून को होगी परीक्षा, लेकिन नियमों पर उठे सवाल
NEET UG 2026 री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाना तय है, जिसमें वे सभी छात्र शामिल होंगे जिन्होंने 3 मई की परीक्षा दी थी। लेकिन जेल में बंद आरोपी को परीक्षा की तैयारी की अनुमति मिलने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या परीक्षा प्रणाली में कोई खामी है या फिर यह नियमों का पालन है।
एनटीए के नियमों के अनुसार, पहले परीक्षा में शामिल सभी उम्मीदवार री-एग्जाम में बैठ सकते हैं। इसी आधार पर आरोपी को भी पात्र माना गया है। हालांकि, इस पूरे मामले ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अगली सुनवाई 15 जून 2026 को निर्धारित है, जिसमें मामले पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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