बिहार सरकार ने राज्य के अनुदानित मदरसों की जांच कराने का बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को आदेश दिया है कि मदरसों की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए। इस जांच में यह देखा जाएगा कि सरकार से मिलने वाला पैसा सही तरीके से इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि मदरसों में पढ़ाई की स्थिति कैसी है और वहां कितने छात्र पढ़ रहे हैं। सरकार का कहना है कि कई जगहों से शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।
हर प्रखंड में होगी टीम, मौके पर जाकर होगी जांच
जांच के लिए हर प्रखंड में तीन लोगों की एक टीम बनाई जाएगी। इसमें बीडीओ या सीओ, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक शामिल होंगे। यह टीम मदरसों में जाकर सीधे जांच करेगी। सिर्फ कागजों की जांच नहीं होगी, बल्कि जमीन पर जाकर देखा जाएगा कि वहां पढ़ाई हो रही है या नहीं। कक्षाएं चल रही हैं या नहीं, छात्रों की उपस्थिति कितनी है और बिल्डिंग की हालत कैसी है—इन सब बातों की जांच की जाएगी। इसके साथ ही फोटो और जरूरी सबूत भी जुटाए जाएंगे।
BJP ने किया सरकार के फैसले का समर्थन
इस मामले पर बिहार बीजेपी ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है। पार्टी नेता दानिश इकबाल ने कहा कि अगर कोई संस्थान सिर्फ कागजों पर चल रहा है और सरकार से पैसा ले रहा है, तो उसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे फर्जी संस्थानों को बंद कर देना चाहिए। उनका कहना है कि यह नियम सिर्फ मदरसों पर ही नहीं, बल्कि हर उस संस्थान पर लागू होना चाहिए जो गलत तरीके से सरकारी पैसे का फायदा ले रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे कोई भी फर्जीवाड़ा न कर सके।
10 दिन में रिपोर्ट देनी होगी, आगे होगी कार्रवाई
सरकार ने साफ कहा है कि जांच पूरी होने के बाद टीम को 10 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को देनी होगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद शिक्षा व्यवस्था को सुधारना और सरकारी पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और किन संस्थानों पर कार्रवाई होती है। फिलहाल इस फैसले को लेकर बिहार में चर्चा तेज हो गई है।
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