बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। शुक्रवार (29 मई, 2026) को जारी नई सूची ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। यह बदलाव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर किया गया बताया जा रहा है, जिसमें संगठन को और मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार की गई है। सूची जारी होते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में चर्चा का माहौल बन गया है और कई जिलों में इसे लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
14 उपाध्यक्ष और कई पदाधिकारियों की नियुक्ति से बदला संगठन ढांचा
नई सूची के अनुसार 14 नेताओं को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। इसके अलावा 5 प्रदेश महामंत्री और 14 प्रदेश मंत्रियों की भी नियुक्ति की गई है। संगठन को और प्रभावी बनाने के लिए 3 कोषाध्यक्ष, एक प्रदेश मुख्यालय प्रभारी और एक कार्यालय पदाधिकारी का भी चयन किया गया है। इस बदलाव को पार्टी के अंदर संतुलन बनाने और नए नेतृत्व को मौका देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका में बदलाव ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान भी खींचा है।
7 मोर्चा अध्यक्षों में बड़ा बदलाव
संगठनात्मक फेरबदल के तहत सात प्रमुख मोर्चों के अध्यक्ष भी बदल दिए गए हैं। युवा मोर्चा की जिम्मेदारी अब जितेंद्र सिंह को सौंपी गई है, जबकि पहले यह पद भारतेंदु मिश्र के पास था। महिला मोर्चा में भी बदलाव किया गया है और विधायक निशा सिंह को नया अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह किसान मोर्चा की जिम्मेदारी राम सुमिरन सिंह को दी गई है। ओबीसी मोर्चा का नेतृत्व प्रमोद चंद्रवंशी को सौंपा गया है। अनुसूचित जाति मोर्चा की जिम्मेदारी विधायक सुजीत पासवान को मिली है, जबकि अनुसूचित जनजाति मोर्चा की कमान निरंजन पंजियार थारू को दी गई है। अल्पसंख्यक मोर्चा का नेतृत्व अब महबुल हक करेंगे।
संगठनात्मक रणनीति और आगामी चुनावों की तैयारी पर फोकस
पार्टी नेतृत्व के अनुसार यह बदलाव संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और आगामी चुनावी रणनीति को धार देने के उद्देश्य से किया गया है। माना जा रहा है कि इस नई टीम के जरिए पार्टी विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश कर रही है। Nitin Naveen के निर्देश पर जारी इस सूची के बाद अब संगठन के अंदर नई ऊर्जा और सक्रियता देखने को मिल सकती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फेरबदल आने वाले समय में बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण असर डाल सकता है और संगठन की कार्यशैली में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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