‘जब इतनी निगरानी थी तो पेपर लीक कैसे हुआ?’ NEET मामले पर सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवालों से बढ़ी NTA की मुश्किल

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बेहद सख्त टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार से कई सीधे सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और उम्मीदों के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं, ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जस्टिस नरसिम्हा ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश के युवाओं को इस तरह निराश नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा के पीछे छात्रों की भावनाएं, मानसिक मेहनत और परिवारों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि वह इस मामले को केवल एक तकनीकी गलती मानकर छोड़ने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने कहा कि अगर सुरक्षा और निगरानी के दावे किए गए थे, तो फिर इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर कैसे हुई? इस दौरान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कोर्ट के निर्देश के अनुसार हलफनामा दाखिल कर दिया गया है।

कोर्ट ने एक्सपर्ट कमेटी से भी पूछे कड़े सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम Court ने केवल NTA ही नहीं बल्कि उस हाई-पावर एक्सपर्ट कमेटी पर भी सवाल उठाए, जिसका गठन परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किया गया था। इस कमेटी की अध्यक्षता प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शिक्षाविद डॉ. राधाकृष्णन कर रहे थे। अदालत ने उनसे पूछा कि जब आप शुरू से इस प्रक्रिया का हिस्सा थे और आपकी सिफारिशों के आधार पर निगरानी तंत्र बनाया गया था, तो फिर इतनी बड़ी गड़बड़ी क्यों नहीं रोकी जा सकी। कोर्ट ने कहा कि अगर हाई-पावर कमेटी की सिफारिशों के बावजूद पेपर लीक जैसी घटनाएं हो रही हैं, तो इसका मतलब है कि या तो सिफारिशें पर्याप्त नहीं थीं या फिर उनकी निगरानी और क्रियान्वयन में गंभीर कमी रही। अदालत ने कहा कि केवल नियम बनाना काफी नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि उन्हें जमीन पर किस तरह लागू किया जा रहा है। कोर्ट की इन टिप्पणियों के बाद NTA और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बहस और तेज हो गई है।

‘भविष्य की परीक्षाओं का रोडमैप बताइए’

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और NTA को निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें भविष्य की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट रोडमैप पेश करना होगा। अदालत ने कहा कि संबंधित मंत्रालय एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे, जिसमें बताया जाए कि आने वाले वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया को किस तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि संस्था को मजबूत बनाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर क्या सुधार किए जा रहे हैं। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि अदालत का उद्देश्य केवल वर्तमान मामले की सुनवाई करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भविष्य में 2024 और 2026 जैसी घटनाएं दोबारा न हों। अदालत ने कहा कि परीक्षा एजेंसियों को तकनीकी और बौद्धिक रूप से इतना मजबूत बनाया जाना चाहिए कि किसी भी तरह की लीक, गड़बड़ी या धोखाधड़ी की संभावना खत्म हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 2 जुलाई से पहले नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता

NEET-UG पेपर लीक मामले ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। लाखों छात्र हर साल इस परीक्षा की तैयारी में कई साल लगाते हैं और बड़ी आर्थिक व मानसिक चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे में जब परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो छात्रों का भरोसा कमजोर होता है। कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब यह मुद्दा केवल परीक्षा गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे परीक्षा सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कई छात्र संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों ने भी मांग की है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए। वहीं विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब सबकी नजर अगली सुनवाई और सरकार के नए जवाब पर टिकी हुई है।

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