अमेरिका में राष्ट्रपति Donald Trump को निशाना बनाने की साजिश ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इस मामले में आरोपी कोल टॉमस एलन को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया है। जांच के दौरान सामने आया कि उसने हमले से पहले एक लंबा दस्तावेज तैयार किया था, जिसमें उसने अपनी पूरी योजना और गुस्से की वजह लिखी थी। इस दस्तावेज में उसने कई बड़े नेताओं और अधिकारियों को निशाना बनाने की बात कही थी। लेकिन इसी सूची में एक नाम का न होना सबसे ज्यादा चौंकाने वाला रहा—एफबीआई डायरेक्टर Kash Patel। यह बात अब जांच का सबसे अहम हिस्सा बन गई है।
काश पटेल का नाम क्यों नहीं आया?
जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर काश पटेल को इस लिस्ट से बाहर क्यों रखा गया। कुछ शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आरोपी की सोच और धार्मिक नजरिया इसके पीछे एक वजह हो सकता है। बताया जा रहा है कि आरोपी कुछ खास धर्मों के खिलाफ सोच रखता था, जबकि काश पटेल हिंदू धर्म से आते हैं। हालांकि, अधिकारी इस बात की अभी पुष्टि नहीं कर रहे हैं और इसे सिर्फ एक संभावना मान रहे हैं। इस मामले में हर एंगल से जांच की जा रही है ताकि असली वजह सामने आ सके।
क्या सिर्फ ट्रंप ही थे मुख्य निशाना?
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का मुख्य लक्ष्य सिर्फ ट्रंप और उनके करीबी लोग थे। उसने अपने दस्तावेज में लिखा था कि वह किन लोगों को प्राथमिकता के आधार पर निशाना बनाना चाहता है। कुछ सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों को अपने निशाने से बाहर रखा था। इसी वजह से काश पटेल का नाम उसमें शामिल नहीं किया गया। यह भी एक बड़ा कारण हो सकता है, लेकिन अभी इसकी पुष्टि होना बाकी है।
जांच जारी, कई सवाल अब भी बाकी
इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अभी नहीं मिला है। आरोपी की मंशा, उसकी सोच और उसकी योजना को समझने के लिए एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। मैनिफेस्टो से यह जरूर साफ है कि यह कोई अचानक किया गया कदम नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। आने वाले समय में जांच से और खुलासे हो सकते हैं, जो इस मामले को पूरी तरह स्पष्ट करेंगे। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां हर छोटी-बड़ी जानकारी को जोड़कर सच तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
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