सफेद घोड़ा, चमकती रोशनी और पुराने यार… वैज्ञानिकों ने खोला मरते हुए इंसान के सपनों का राज!

मौत एक ऐसा अटल सत्य है जिससे हर इंसान बचना चाहता है, लेकिन यह सबको आनी है। सदियों से यह सवाल कौतूहल का विषय रहा है कि आखिरी वक्त में इंसान क्या महसूस करता है? क्या वाकई यमराज या फरिश्ते आते हैं, या फिर यह महज एक कल्पना है? हाल ही में इटली के IRCCS (Reggio Emilia) के शोधकर्ताओं ने इस रहस्यमयी पर्दे को उठाने की कोशिश की है। वैज्ञानिकों ने 239 विशेषज्ञों के अनुभवों और सैकड़ों मरीजों के ‘विजन्स’ का विश्लेषण कर एक ऐसी रिपोर्ट तैयार की है जिसे विज्ञान की भाषा में ‘एंड ऑफ लाइफ ड्रीम्स’ (End-of-Life Dreams) कहा जाता है। यह रिपोर्ट बताती है कि जब शरीर साथ छोड़ रहा होता है, तब दिमाग एक अलग ही दुनिया की सैर कर रहा होता है।

जब मरे हुए अपने हाथ फैलाए खड़े मिलते हैं

इस रिसर्च का सबसे भावुक कर देने वाला हिस्सा वह है, जहाँ मरीजों ने अपने उन प्रियजनों को देखने का दावा किया जो बरसों पहले दुनिया छोड़ चुके थे। किसी को अपनी मां की लोरी सुनाई दी, तो किसी को अपना पुराना बिछड़ा दोस्त मिला। एक महिला मरीज ने बताया कि उसे उसका दिवंगत पति आवाज दे रहा था कि “जल्दी आ जाओ, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।” वैज्ञानिकों का मानना है कि ये सपने जाने वाले व्यक्ति के लिए ‘मरहम’ का काम करते हैं। ये अहसास उसे यह तसल्ली देता है कि मौत के बाद का सफर सुनसान नहीं है, बल्कि वहां कोई अपना खड़ा है। इसके अलावा, कई लोगों ने एक तेज ‘नूर’ (चमकती रोशनी) और ऊपर की ओर जाती सीढ़ियां देखने की बात भी कुबूल की है।

सफेद घोड़ा, मखमली वादियाँ और अंधेरे साये

सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि कुदरत के खूबसूरत नजारे भी इन सपनों का हिस्सा बनते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई मरीजों ने समुद्र किनारे दौड़ते सफेद घोड़े, खिलते हुए फूलों के बाग और शांत वादियों के सपने देखे। लेकिन इस सिक्के का एक दूसरा और डरावना पहलू भी है। रिसर्च में यह भी सामने आया कि कुछ मरीजों को भयानक परछाइयाँ और राक्षस जैसे चेहरे दिखाई दिए। मनोविज्ञानिकों का कहना है कि ये डरावने सपने दरअसल इंसान के जीवन भर के डर, अधूरी इच्छाएं और मन में दबी हुई हीनभावना का परिणाम होते हैं। अगर इंसान ने जीवन में बहुत तनाव या ग्लानि महसूस की है, तो आखिरी वक्त में ये डर ‘विलेन’ बनकर सामने आते हैं।

दिमाग का खेल या रूहानी संकेत?

बड़ी बात यह है कि अधिकतर लोग इन अनुभवों को बताने से डरते हैं, उन्हें लगता है कि समाज उन्हें ‘पागल’ करार दे देगा। विज्ञान इसे दिमाग में होने वाले रासायनिक बदलाव, यादों और तनाव का एक ‘कॉकटेल’ मानता है। जब अंग काम करना बंद कर देते हैं, तो मस्तिष्क यादों के पिटारे से सबसे सुखद पल निकालकर सामने रख देता है ताकि अंत समय में सुकून मिल सके। वहीं, आध्यात्मिक नजरिए से इसे रूह का अपने असली घर लौटने का संकेत माना जाता है। निष्कर्ष यह है कि अगर आखिरी वक्त के सपने सुकून भरे हैं, तो मौत की तड़प कम हो जाती है और इंसान शांति से विदा लेता है। यह रिसर्च साबित करती है कि मौत सिर्फ एक अंत नहीं, बल्कि अनुभवों की एक अनोखी यात्रा है।

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