वेदांता प्लांट में मौत का मंजर, आखिर किसकी लापरवाही से गई 20 मजदूरों की जान?

छत्तीसगढ़ के Sakti जिले में स्थित वेदांता प्लांट के पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दुर्घटना में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 16 मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है। हादसे के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। मजदूरों के परिजन अपने प्रियजनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं प्रशासन और कंपनी पर जवाबदेही तय करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

मुआवजे का ऐलान, पर उठे संतोष के सवाल

हादसे के बाद कंपनी और सरकार दोनों ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये और एक आश्रित को नौकरी देने का वादा किया है। वहीं केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त 7-7 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है। इस तरह कुल मुआवजा 42 लाख रुपये तक पहुंच गया है। घायलों के लिए भी आर्थिक मदद और बेहतर इलाज का आश्वासन दिया गया है। हालांकि मजदूर संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी त्रासदी के लिए यह मुआवजा पर्याप्त नहीं है और उन्होंने एक करोड़ रुपये और स्थायी नौकरी की मांग उठाई है।

FIR दर्ज, प्रबंधन पर शिकंजा कसना शुरू

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भी सख्त रुख अपनाया है। प्लांट के प्रबंधक सहित 8 से 10 लोगों के खिलाफ नामजद और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है। इससे पहले इस मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए थे। अब जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जांच में ऑपरेशनल फॉल्ट का खुलासा, राजनीति भी तेज

प्रारंभिक जांच में इंडस्ट्रियल सेफ्टी विभाग ने हादसे की वजह ऑपरेशनल फॉल्ट को बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, बॉयलर में अचानक प्रोडक्शन लोड बढ़ने से तकनीकी गड़बड़ी हुई, जिसने यह बड़ा हादसा जन्म दिया। अब 18 अप्रैल को केंद्रीय टीम भी जांच के लिए मौके पर पहुंचने वाली है, जिसके बाद विस्तृत रिपोर्ट सामने आएगी। इस बीच Indian National Congress ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और कंपनी दोनों पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा है और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। कुल मिलाकर यह घटना अब केवल औद्योगिक हादसा नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

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