RJD से शुरू, लालू का साथ छोड़ा… अब BJP से CM! सम्राट चौधरी की फिल्मी सियासी कहानी

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हो चुका है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सम्राट चौधरी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बना दिया गया है। मंगलवार को हुई एनडीए विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगी और इसके बाद उन्होंने राज्य की कमान संभाल ली। इस फैसले के साथ ही बिहार में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत मानी जा रही है।

एनडीए की बैठक में सर्वसम्मति, बड़े नेताओं की मौजूदगी

पटना में हुई अहम बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद रहे। इसके अलावा कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में सम्राट चौधरी को नेता चुना गया और उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। लंबे समय से उनके नाम की चर्चा चल रही थी, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लग चुकी है। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद बीजेपी और एनडीए कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

आरजेडी से शुरू हुआ सफर, कई राजनीतिक मोड़ों के बाद शीर्ष तक पहुंचे

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने राजनीति की शुरुआत लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी से की थी। साल 1999 में राबड़ी देव की सरकार में कृषि मंत्री रहे। बाद में 2014 में वे जेडीयू में शामिल हुए और जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री बने। साल 2018 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की और अब मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं।

राजनीतिक विरासत से मिली ताकत, अब खुद की पहचान बनाने की चुनौती

सम्राट चौधरी एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के प्रभावशाली नेता रहे हैं। उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए सम्राट चौधरी ने खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहने के बाद अब मुख्यमंत्री बनना उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव है। अब उनकी सबसे बड़ी चुनौती बिहार की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना और राज्य को नई दिशा देना होगा।

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