ड्यूटी करते-करते गई जान! चंबल में रेत माफिया की हैवानियत, SC ने लिया संज्ञान

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में अवैध रेत खनन को रोकने के दौरान वन आरक्षक Harikesh Gurjar की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि गश्त के दौरान उन्होंने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश की, जो अवैध रूप से रेत ले जा रही थी। इसी दौरान चालक ने वाहन को नहीं रोका और सीधे उन्हें कुचलते हुए फरार हो गया। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद मामला सीधे Supreme Court of India तक पहुंच गया, जिसने संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन को सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

कानून के बावजूद फल-फूल रहा अवैध रेत कारोबार

चंबल नदी का यह इलाका पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, जहां करीब 435 किलोमीटर क्षेत्र में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यहां लंबे समय से अवैध रेत खनन का नेटवर्क सक्रिय है। हैरानी की बात यह है कि इस पर पहले से ही अदालतों के स्पष्ट आदेश लागू हैं, फिर भी रसूखदार और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से यह कारोबार लगातार जारी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मुरैना जिले के कई घाटों पर खुलेआम रेत का उत्खनन और परिवहन होता रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग की टीम लगातार कार्रवाई कर रही थी, लेकिन इस बार स्थिति ने हिंसक रूप ले लिया।

पुलिस की कार्रवाई तेज, आरोपी गिरफ्त में

वन आरक्षक की मौत के बाद पुलिस और प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। इस मामले में हत्या का केस दर्ज किया गया है और जांच के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉली से जुड़े लोगों की पहचान की गई। पुलिस ने वाहन मालिक सोनू चौहान और पवन तोमर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी चालक अब भी फरार है। उसे पकड़ने के लिए कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और अवैध खनन से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जाएगी। साथ ही अन्य संदिग्धों पर भी नजर रखी जा रही है, जिससे यह साफ है कि अब प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से कदम उठा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान से बढ़ा दबाव, बड़े एक्शन के संकेत

इस घटना के बाद सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब Supreme Court of India ने मामले का संज्ञान लिया। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार, पुलिस और वन विभाग में हड़कंप मच गया है। अब अवैध रेत खनन के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएं और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था की चुनौती को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करने वाले कर्मचारियों को किस तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस कार्रवाई से अवैध खनन पर वास्तव में रोक लग पाती है या नहीं।

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