संघर्ष की मिसाल! 2 किलोमीटर पैदल स्कूल जाती रही दिव्यांग बच्ची, वायरल वीडियो के बाद प्रशासन ने किया ये काम

बिहार के गोपालगंज जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। यहां एक 15 साल की दिव्यांग बच्ची ने यह साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ करने का जज़्बा हो तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। गोपालगंज के भोरे प्रखंड के हुस्सेपुर गांव की रहने वाली सोनी कुमारी दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, लेकिन इसके बावजूद वह हर दिन लगभग दो किलोमीटर का सफर तय करके स्कूल जाती थीं।

सोनी का यह संघर्ष तब लोगों के सामने आया जब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में वह अपने कमजोर पैरों के बावजूद धीरे-धीरे चलकर स्कूल जाते हुए दिखाई दे रही थीं। यह दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो गया और लोगों ने उनकी हिम्मत की जमकर तारीफ की। सोनी की कहानी उन बच्चों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है, जो छोटी-छोटी परेशानियों के कारण पढ़ाई से दूर हो जाते हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद सोनी ने कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

मां अकेले संभाल रही है पूरा परिवार

सोनी कुमारी की जिंदगी शुरुआत से ही कठिनाइयों से भरी रही है। बताया जाता है कि उनके जन्म के कुछ समय बाद ही उनके पिता नंदकिशोर राम का निधन हो गया था। पिता के जाने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां गुलाइची देवी पर आ गई।

गुलाइची देवी मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलाती हैं और अपनी बेटी की देखभाल भी करती हैं। उनका कहना है कि सोनी बचपन से ही दोनों पैरों से दिव्यांग है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह अपनी बेटी का सही इलाज भी नहीं करा सकीं। मां के मुताबिक कई बार उन्होंने सरकारी योजनाओं के तहत मदद पाने की कोशिश की। उन्होंने अधिकारियों को आवेदन भी दिए, लेकिन लंबे समय तक उनकी बेटी को कोई सुविधा नहीं मिल सकी। इसके बावजूद सोनी ने कभी हार नहीं मानी और पढ़ाई जारी रखी।

 वीडियो वायरल हुआ तो प्रशासन हरकत में आया

सोनी की मेहनत और संघर्ष की कहानी तब पूरे देश के सामने आई जब उनका स्कूल जाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि वह अपनी शारीरिक परेशानी के बावजूद हर दिन पैदल ही स्कूल जा रही हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन का ध्यान इस मामले की ओर गया। गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने तुरंत इस मामले को संज्ञान में लिया और सोनी को ट्राईसाइकिल देने का फैसला किया। कुछ ही समय में प्रशासन की ओर से सोनी को ट्राईसाइकिल उपलब्ध करा दी गई, जिससे अब उन्हें स्कूल जाने में पहले की तरह कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस कदम के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की सराहना भी की।

 डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती है सोनी

सोनी कुमारी फिलहाल एक पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो साल से इसी स्कूल में पढ़ने जा रही हैं। स्कूल में उनकी फीस नहीं लगती, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें रोज पैदल चलना पड़ता था। सोनी का सपना है कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनें और समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करें। उनका कहना है कि पढ़ाई ही वह रास्ता है जो उन्हें अपने सपनों तक पहुंचा सकता है।

दिलचस्प बात यह भी है कि सोनी जिस क्षेत्र में रहती हैं, वह बिहार के शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद लंबे समय तक उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि अब ट्राईसाइकिल मिलने के बाद उनके लिए स्कूल जाना थोड़ा आसान हो गया है। सोनी की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादों के सामने बड़ी से बड़ी मुश्किल भी छोटी पड़ जाती है। उनकी हिम्मत और संघर्ष आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।

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