Bangladesh Politics इस बार ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक मुश्किल थी। आम चुनाव के नतीजों ने वहां की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल दिया है। जिन नेताओं के नाम कभी बड़े आपराधिक मामलों और अदालतों के फैसलों से जुड़े थे, वही अब नई संसद का हिस्सा बनने जा रहे हैं। इन नेताओं में दो नाम बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी से जुड़े हैं, जिसका नेतृत्व तारिक रहमान कर रहे हैं, जबकि तीसरा नेता जमात-ए-इस्लामी से संबंध रखता है।
कुछ समय पहले तक ये तीनों नेता गंभीर आरोपों का सामना कर रहे थे। राजनीतिक हालात ऐसे बने कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर भारत चली गईं। इसके बाद अंतरिम व्यवस्था में नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने सत्ता की कमान संभाली। उनके कार्यकाल के दौरान इन नेताओं के खिलाफ चल रहे कई मामलों को खत्म कर दिया गया। इसके बाद हुए चुनाव में इनकी किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि अब ये संसद की कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं। Bangladesh Politics में यह बदलाव सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि सियासी संतुलन के बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कौन हैं ये तीन चेहरे, जिनकी किस्मत ने ली ऐसी करवट
इन तीन नेताओं में पहला नाम लुत्फोज्जमान बाबर का है, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। दूसरा नाम अब्दुस सलाम पिंटू का है, जो इसी पार्टी से जुड़े हैं। तीसरे नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम हैं, जो जमात-ए-इस्लामी से संबंध रखते हैं। इन तीनों का नाम कभी बड़े मामलों में सामने आया था, लेकिन अब ये चुनाव जीतकर संसद में पहुंच रहे हैं।
दिसंबर 2024 में एक अदालत ने 21 अगस्त 2004 के ग्रेनेड हमले से जुड़े मामले में तारिक रहमान और लुत्फोज्जमान बाबर समेत कई लोगों को बरी कर दिया था। यह हमला शेख हसीना को निशाना बनाकर किया गया था, जिसमें 24 लोगों की मौत हुई थी। अदालत के फैसले के बाद बाबर की राजनीतिक राह आसान हुई और उन्होंने हालिया चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी को लगभग एक लाख साठ हजार वोटों से हराकर जीत दर्ज की। वहीं अब्दुस सलाम पिंटू को भी बाद में राहत मिली और उनके खिलाफ लगे आरोप हटाए गए। उन्होंने भी इस चुनाव में भारी मतों से जीत हासिल की। एटीएम अजहरुल इस्लाम, जिन्हें पहले गंभीर आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई थी, अब बरी होकर संसद में पहुंचने वाले हैं। Bangladesh Politics में यह घटनाक्रम अभूतपूर्व माना जा रहा है।
भारत की चिंता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर सवाल
Bangladesh Politics में आए इस बदलाव को भारत भी ध्यान से देख रहा है। खासकर अब्दुस सलाम पिंटू को लेकर भारतीय एजेंसियों की चिंता ज्यादा बताई जा रही है। उन पर पहले पाकिस्तान से जुड़े एक आतंकी संगठन के समर्थन का आरोप लगा था। भारत में वाराणसी अदालत परिसर, अजमेर शरीफ दरगाह और दिल्ली में हुए धमाकों के संदर्भ में उनका नाम चर्चाओं में रहा था। हालांकि अदालतों से राहत मिलने के बाद वे अब राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और चुनाव जीत चुके हैं।
नई दिल्ली के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश और भारत के रिश्ते हाल के वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा था, लेकिन हालिया राजनीतिक बदलाव ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्रीय शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा अहम होगी। Bangladesh Politics में हो रहे इस बदलाव का असर सीमा सुरक्षा, व्यापार और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।
तारिक रहमान की अगली चाल पर टिकी निगाहें
अब सबसे ज्यादा नजरें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि जब वे औपचारिक रूप से शपथ लेंगे और नई सरकार की दिशा तय करेंगे, तब यह साफ होगा कि Bangladesh Politics किस ओर बढ़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रहमान के सामने आर्थिक चुनौतियां, महंगाई और बेरोजगारी जैसे बड़े मुद्दे होंगे। ऐसे में उन्हें व्यावहारिक और संतुलित नीति अपनानी होगी।
अंतरिम सरकार के दौरान जो फैसले लिए गए, उन्होंने कई पुराने मामलों को खत्म कर राजनीतिक समीकरण बदले। अब नई संसद में वे चेहरे बैठेंगे, जिनके नाम कभी अदालतों में गूंजते थे। Bangladesh Politics का यह नया अध्याय बताता है कि यहां सत्ता का खेल कितनी तेजी से बदल सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह बदलाव स्थिरता लाता है या नए विवादों को जन्म देता है। फिलहाल इतना तय है कि इस चुनाव ने बांग्लादेश की राजनीति को पूरी तरह नई दिशा दे दी है।
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