India-US Trade Deal के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। इस मुद्दे पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सीधा जवाब देने से परहेज किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि यह विषय विदेश मंत्रालय के दायरे में आता है और वही इस पर आधिकारिक बयान देगा। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर दावा किया था कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के साथ ही भारत रूस से तेल की खरीद रोक देगा। इस दावे के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सूत्रों के हवाले से यह जरूर सामने आया कि भारत अपने फैसले देश की जरूरतों और बाजार की स्थितियों को ध्यान में रखकर करेगा। सरकार का रुख साफ है कि गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से, जो बाजार में सबसे बेहतर कीमत पर तेल उपलब्ध कराएंगी, उनसे खरीद जारी रह सकती है। यानी तेल की खरीद पूरी तरह व्यावसायिक शर्तों और राष्ट्रीय हितों पर निर्भर रहेगी, न कि किसी एक देश के दबाव पर।
टैरिफ को लेकर गोयल का दावा, भारत को मिला बेहतर सौदा
India-US Trade Deal पर विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं पीयूष गोयल ने टैरिफ के मुद्दे पर भारत की स्थिति को मजबूत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर जो टैरिफ लगाता है, वह कई अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अमेरिका वियतनाम और बांग्लादेश पर करीब 20 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत और चीन पर 35 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता है, जबकि भारत को इससे कम टैरिफ का सामना करना पड़ता है। गोयल के मुताबिक यह डील भारतीय निर्यातकों के लिए फायदेमंद साबित होगी, क्योंकि कई ऐसे उत्पाद हैं जिन्हें भारत बिना किसी टैरिफ के अमेरिका भेज सकता है। उन्होंने स्मार्टफोन सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में भारत के निर्यातकों को खास फायदा मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह समझौता भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाएगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
किसानों की सुरक्षा पर जोर, आत्मनिर्भर उत्पाद डील से बाहर
India-US Trade Deal को लेकर सबसे ज्यादा चिंता किसानों को लेकर जताई जा रही थी, लेकिन पीयूष गोयल ने साफ किया कि जिन उत्पादों में भारत आत्मनिर्भर है, उन्हें इस डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें, मांस, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी और मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी और अमरंथ को कम टैरिफ पर भारत में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी और खट्टे फलों पर भी कोई रियायत नहीं दी गई है। ग्रीन टी, काबुली चना, मूंग, तिलहन, मूंगफली, माल्ट, गैर-अल्कोहल पेय, स्टार्च, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पाद भी डील से बाहर हैं। गोयल ने कहा कि इस तरह सरकार ने भारतीय किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की है। वहीं कुछ कृषि उत्पाद ऐसे भी हैं, जिनके अमेरिका निर्यात पर शून्य टैरिफ लगेगा, जैसे मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, काजू और कई फल-सब्जियां, जिससे किसानों को नए बाजार मिलेंगे।
विपक्ष पर हमला और संसद पर बयान, डील से देश में उत्साह
India-US Trade Deal पर चर्चा के दौरान पीयूष गोयल ने विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कुछ लोग किसान विरोधी हैं और जानबूझकर किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। गोयल ने कहा कि विपक्ष इस बात से परेशान है कि इस ट्रेड डील में कृषि उत्पादों पर कोई बड़ी रियायत नहीं दी गई। संसद में चर्चा के सवाल पर उन्होंने कहा कि सदन में क्या पढ़ा जाना चाहिए और क्या नहीं, यह स्पीकर और चेयरमैन तय करते हैं। हर बात संसद में पढ़ना जरूरी नहीं होता, कई बार सीधे देश की जनता तक जानकारी पहुंचाना ज्यादा जरूरी होता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस व्यापारिक समझौते से देश में खुशी और उत्साह का माहौल है। उद्योग, किसान और निर्यातक सभी को इससे लाभ होगा। सरकार का मानना है कि यह डील भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक नतीजे साफ दिखाई देंगे।







