Monday, February 2, 2026

रणबीर की रामायण पर क्यों उठे सवाल? आदिपुरुष से तुलना पर अरुण गोविल का दो टूक जवाब

Ramayana vs Adipurush: रामायण भारतीय संस्कृति और आस्था का ऐसा महाकाव्य है, जो पीढ़ियों से लोगों के जीवन का हिस्सा रहा है। टीवी से लेकर बड़े पर्दे तक भगवान राम की गाथा को अलग-अलग रूपों में दिखाया गया, लेकिन 90 के दशक में रामानंद सागर की रामायण ने जो छाप छोड़ी, वह आज भी कायम है। इस रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल आज भी लोगों के दिलों में ‘राम’ के रूप में बसे हुए हैं। अब एक बार फिर रामायण चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह है नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म रामायण, जिसे करीब 4000 करोड़ रुपये के बजट की फिल्म बताया जा रहा है। इस फिल्म में अरुण गोविल खुद भगवान राम नहीं, बल्कि राजा दशरथ के किरदार में नजर आएंगे। जैसे ही फिल्म का पहला लुक सामने आया, सोशल मीडिया पर तुलना शुरू हो गई—कभी 1987 की रामायण से, तो कभी ओम राउत की आदिपुरुष से।

दो पार्ट में बनेगी रामायण, स्टारकास्ट पर टिकी निगाहें

नितेश तिवारी की रामायण को दो पार्ट में रिलीज किया जाएगा। पहला पार्ट 2026 में आईमैक्स पर रिलीज होने की तैयारी में है, जबकि दूसरा पार्ट दिवाली 2027 के आसपास आने की उम्मीद जताई जा रही है। फिल्म की स्टारकास्ट भी लगातार चर्चा में बनी हुई है। भगवान राम के किरदार में रणबीर कपूर नजर आएंगे, माता सीता की भूमिका साई पल्लवी निभा रही हैं, रावण के रोल में साउथ सुपरस्टार यश दिखाई देंगे, हनुमान का किरदार सनी देओल निभा रहे हैं और लक्ष्मण के रूप में रवि दुबे नजर आएंगे। इतने बड़े कलाकारों और भारी बजट की वजह से फैंस की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। जैसे ही फिल्म से जुड़ी झलक सामने आई, लोगों ने तुरंत तुलना शुरू कर दी—खासतौर पर अरुण गोविल के भगवान राम और रणबीर कपूर के नए अवतार को लेकर।

तुलना पर अरुण गोविल का साफ बयान, ‘लुक बेहद जरूरी’

रामायण और उसमें निभाए गए किरदारों की तुलना पर अरुण गोविल ने खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि जब कोई काम एक स्तर या मानक बना देता है, तो उसकी तुलना होना स्वाभाविक है। इसमें किसी को भी बुरा मानने की जरूरत नहीं है। अरुण गोविल का मानना है कि भगवान का किरदार निभाना सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि भगवान राम जैसे चरित्र के लिए लुक बहुत मायने रखता है। जब दर्शक आपको देखें, तो उन्हें आप में भगवान की छवि नजर आनी चाहिए और उनके मन में यह भावना आए कि ‘भगवान ऐसे हो सकते हैं’। उनका कहना था कि यह तुलना नई पीढ़ी की फिल्म के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन अगर नीयत साफ हो और प्रस्तुति मजबूत हो, तो दर्शक उसे स्वीकार करते हैं।

नई रामायण बनाम आदिपुरुष, क्यों अलग है दोनों की सोच

अरुण गोविल ने नई रामायण और आदिपुरुष की तुलना पर भी अपनी राय दी। उन्होंने साफ कहा कि दोनों के बीच काफी फर्क है। आदिपुरुष, जो ओम राउत के निर्देशन में बनी थी, बॉक्स ऑफिस पर बड़ी उम्मीदों के बावजूद दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाई। प्रभास, सैफ अली खान और कृति सेनन जैसे बड़े सितारों के बावजूद फिल्म को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और यह एक बड़ी फ्लॉप साबित हुई। अरुण गोविल का मानना है कि रामायण जैसे विषय को दिखाते समय भावनाओं, आस्था और प्रस्तुति का खास ख्याल रखना जरूरी होता है। उन्होंने इशारों में कहा कि नई रामायण को सिर्फ भव्यता नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सम्मान के साथ पेश किया जाना चाहिए। यही वजह है कि लोग इस फिल्म से ज्यादा उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखना होगा कि नितेश तिवारी की रामायण दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और क्या यह रामायण एक बार फिर इतिहास रच पाएगी।

 

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