आम आदमी अक्सर यह सोचकर परेशान रहता है कि इतनी मेहनत के बाद भी पैसा क्यों नहीं टिकता, बिजनेस क्यों नहीं बढ़ता या प्रमोशन क्यों अटक जाता है। प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य लव भूषण जी के अनुसार इसका जवाब कुंडली के उन भावों में छुपा है, जिन्हें आमतौर पर अशुभ मान लिया जाता है। ज्योतिष में छठा, आठवां और बारहवां भाव अक्सर संघर्ष, कर्ज, बीमारी और खर्च से जोड़े जाते हैं, लेकिन कलयुग में यही भाव बड़े धन का रास्ता खोलते हैं। आचार्य बताते हैं कि जिन लोगों की कुंडली में ये भाव सक्रिय होते हैं, वे जोखिम लेने से नहीं डरते। यही जोखिम उन्हें साधारण नौकरीपेशा से उद्योगपति, निवेशक या प्रभावशाली व्यक्ति बना देता है। बड़ा धन हमेशा सुरक्षित रास्ते से नहीं आता, बल्कि संकट, बदलाव और साहस से पैदा होता है। इसलिए जिन जातकों की कुंडली में ये भाव मजबूत होते हैं, वे गिरकर भी उठना जानते हैं और अंततः सफलता हासिल करते हैं। यही कारण है कि कई बार कम पढ़े-लिखे या संघर्षपूर्ण जीवन वाले लोग भी अचानक बड़ी आर्थिक ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं।
वास्तु का भ्रम टूटेगा: हर दिशा सबके लिए शुभ नहीं होती
वास्तु को लेकर समाज में कई तयशुदा धारणाएं हैं, जैसे पश्चिम में बैठना शुभ है, दक्षिण-पश्चिम में सोना चाहिए या दक्षिण-पूर्व में रसोई होनी ही चाहिए। लेकिन आचार्य लव भूषण जी साफ कहते हैं कि वास्तु कोई रेडीमेड फॉर्मूला नहीं है। हर व्यक्ति की ऊर्जा उसकी जन्मतिथि और कुंडली से जुड़ी होती है। किसी के लिए पश्चिम दिशा तरक्की दिला सकती है, तो किसी के लिए वही दिशा नुकसान और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कमजोर या अशुभ भाव में हो, तो दक्षिण-पूर्व की रसोई घर में कलह, खर्च और बीमारी बढ़ा सकती है। यही वजह है कि एक ही वास्तु नियम किसी के लिए चमत्कार करता है और किसी के लिए परेशानी। आचार्य मानते हैं कि सही वास्तु वही है, जो व्यक्ति की व्यक्तिगत ऊर्जा के अनुसार हो। जब दिशा, ग्रह और व्यक्ति की ऊर्जा एक साथ संतुलन में आती है, तभी धन और स्थिरता जीवन में टिकती है।
पंच तत्व की कमी और धन संकट का गहरा संबंध
ज्योतिष और ऊर्जा विज्ञान के अनुसार पूरी सृष्टि पांच तत्वों—जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश—से बनी है। आचार्य लव भूषण जी का दावा है कि साल 2000 के बाद जन्मे अधिकतर लोगों की कुंडलियों में इन तत्वों का असंतुलन देखने को मिलता है। यही असंतुलन आर्थिक अस्थिरता, निर्णय लेने में भ्रम और मेहनत का पूरा फल न मिलने का कारण बनता है। अगर वायु तत्व कमजोर हो, तो व्यक्ति में बेचैनी और अस्थिरता बढ़ती है, ऐसे में लकड़ी के बर्तनों में भोजन करने से ऊर्जा संतुलित होती है। अग्नि तत्व कमजोर हो तो आत्मविश्वास और निर्णय शक्ति घटती है, जिसे सप्ताह में एक बार कैंडल-लाइट डिनर जैसी छोटी आदत से सुधारा जा सकता है। वहीं आकाश तत्व की कमी होने पर व्यक्ति अवसरों को पहचान नहीं पाता, ऐसे में लोहे के बर्तनों का प्रयोग लाभकारी माना गया है। आचार्य बताते हैं कि ये उपाय साधारण लगते हैं, लेकिन जब रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाए जाते हैं, तो धीरे-धीरे व्यक्ति की सोच, ऊर्जा और आर्थिक स्थिति बदलने लगती है।
लक्ष्मी कृपा, राहु का खेल और कलयुग का धन सूत्र
कलयुग को राहु का युग कहा जाता है, जहां रात में जागना, डिजिटल दुनिया में डूबे रहना और तेज़ बदलाव आम बात है। आचार्य लव भूषण जी के अनुसार राहु अगर सही दिशा में साध लिया जाए, तो वही व्यक्ति को अचानक प्रसिद्धि, पैसा और प्रभाव दिला सकता है। इसके लिए जन्मतिथि के अनुसार सही दिशा में बैठकर मंत्र जप, सही रंगों का प्रयोग और उचित दान बेहद जरूरी है। लक्ष्मी कृपा के लिए गलत फल का दान करने से बचने की सलाह दी जाती है, जबकि गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग से बुध मजबूत होता है और धन के रास्ते खुलते हैं। गुरु ग्रह की शांति के लिए धर्मशाला या सेवा कार्य स्थिरता लाते हैं। शनि के लिए बर्फ का दान या गरीब बच्चों को आइसक्रीम खिलाना भी प्रभावी उपाय माना गया है। इसके अलावा कुंडली में चंद्र-शनि, चंद्र-केतु या चंद्र-शुक्र योग के अनुसार बादाम बहाना, नींबू पानी पिलाना या मीठे चावल खिलाना धन को टिकाने में मदद करता है। आचार्य कहते हैं कि जब ग्रह, दिशा और कर्म एक साथ सही हो जाएं, तो किस्मत खुद दरवाज़ा खटखटाती है और व्यक्ति कंगाल से धनवान बनने की राह पर चल पड़ता है।








