Saturday, January 17, 2026

पीएम के भाषण पर ओवैसी का तीखा वार! बोले—गजनी से 17 करोड़ मुसलमानों को क्यों जोड़ा जा रहा है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोमनाथ मंदिर में दिए गए हालिया भाषण के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर इतिहास, आस्था और पहचान को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी कड़ी में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी के बयान पर तीखा पलटवार किया। ओवैसी ने साफ शब्दों में सवाल उठाया कि सदियों पहले महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए हमलों के लिए आज के भारतीय मुसलमानों को क्यों जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में रहने वाले करीब 17 करोड़ मुसलमानों का उस दौर की घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी बार-बार इतिहास को वर्तमान राजनीति से जोड़कर पेश किया जा रहा है। ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है और यह मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है कि क्या अतीत की घटनाओं के आधार पर आज की पीढ़ी को आंकना सही है।

“गजनी से हमारा क्या रिश्ता?” ओवैसी का सीधा सवाल

ओवैसी ने मंच से सवाल उठाते हुए कहा, “आज के 17 करोड़ भारतीय मुसलमानों का महमूद गजनी से क्या संबंध है? हम इस देश में पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े और यही हमारी पहचान है।” उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यकालीन इतिहास को बार-बार उछालकर एक खास समुदाय को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। ओवैसी के मुताबिक, इस तरह की राजनीति का मकसद केवल समाज में विभाजन और नफरत फैलाना है। उन्होंने कहा कि अगर हर ऐतिहासिक घटना का बदला वर्तमान में लिया जाने लगे, तो देश कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। ओवैसी ने यह भी जोड़ा कि भारत का संविधान समानता और न्याय की बात करता है, न कि किसी समुदाय को उसके धर्म या इतिहास के आधार पर दोषी ठहराने की। उनके इस बयान को मुस्लिम समुदाय की ओर से एक मजबूत राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें वे बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत और खतरनाक है।

इतिहास के चयनात्मक इस्तेमाल पर कड़ा हमला

अपने भाषण में ओवैसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के कथित बयान का भी जिक्र किया, जिसमें इतिहास का बदला लेने जैसी बात कही गई थी। ओवैसी ने चेतावनी दी कि इतिहास का चयनात्मक इस्तेमाल करके किसी एक समुदाय को निशाना बनाना समाज के लिए बेहद नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर आरोप लगाया कि वे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं ताकि मौजूदा राजनीतिक फायदे साधे जा सकें। ओवैसी ने तर्क दिया कि अगर पुराने इतिहास के आधार पर बदले की राजनीति शुरू हो जाए, तो रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में वर्णित घटनाओं का भी हिसाब-किताब शुरू करना पड़ेगा, जो पूरी तरह से बेतुका और अव्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि इतिहास को समझने और उससे सीख लेने की जरूरत है, न कि उसे हथियार बनाकर समाज को बांटने की। इस बयान के जरिए ओवैसी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि इतिहास का इस्तेमाल विकास और एकता के लिए होना चाहिए, न कि नफरत की राजनीति के लिए।

“आज की पीढ़ी पुरानी घटनाओं की जिम्मेदार नहीं”

ओवैसी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि आधुनिक भारत के लिए इस तरह की राजनीति बेहद खतरनाक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान पीढ़ी को सदियों पुरानी घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। ओवैसी के मुताबिक, भारत की असली ताकत उसकी विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों में है, न कि अतीत की चोटों को कुरेदने में। उन्होंने कहा कि आज देश को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों पर राजनीति की जरूरत है, न कि इतिहास के नाम पर डर और नफरत फैलाने की। यह बयान ऐसे समय आया है जब सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान पीएम मोदी ने मंदिर पर हुए ऐतिहासिक हमलों का जिक्र किया था, जिसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। ओवैसी का यह बयान न केवल मौजूदा सियासी माहौल पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि क्या भारत भविष्य की ओर देखेगा या अतीत की बहसों में उलझा रहेगा।

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