ईरान में चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। मंगलवार रात ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान के लोगों को सीधे संबोधित करते हुए प्रदर्शन जारी रखने की अपील की। ट्रंप ने लिखा कि ईरान के देशभक्त अपने विरोध को कमजोर न पड़ने दें और सरकारी संस्थाओं पर कब्जा करें। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से यह भी कहा कि जो लोग हत्याओं और अत्याचारों में शामिल हैं, उनके नाम सुरक्षित रखें क्योंकि उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ट्रंप का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह किसी विदेशी सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में अमेरिकी राष्ट्रपति का अब तक का सबसे खुला समर्थन माना जा रहा है। इससे पहले अमेरिका आमतौर पर ऐसे मामलों में संतुलित भाषा का इस्तेमाल करता रहा है।
‘मदद रास्ते में है’ बयान ने बढ़ाई बेचैनी, बैठकें रद्द करने का ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जब तक ईरान में प्रदर्शनकारियों की कथित बेवजह हत्याएं बंद नहीं होतीं, तब तक उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। ट्रंप का सबसे ज्यादा चर्चा में आया वाक्य रहा – “मदद रास्ते में है।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस तरह की होगी, लेकिन इस एक पंक्ति ने ईरान से लेकर वॉशिंगटन तक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। राजनीतिक जानकार इसे कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंधों या फिर किसी बड़े रणनीतिक कदम की ओर इशारा मान रहे हैं। ट्रंप इससे पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें सैन्य कार्रवाई तक शामिल हो सकती है। उनके इस बयान से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चला आ रहा तनाव अब और गहराने की ओर बढ़ रहा है।
व्हाइट हाउस के संकेत और ईरान का पलटवार
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने 12 जनवरी को जानकारी दी थी कि ईरान के खिलाफ एयरस्ट्राइक उन कई विकल्पों में से एक है, जिन पर राष्ट्रपति ट्रंप विचार कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि कूटनीति अमेरिका की पहली प्राथमिकता है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बासी अरागची का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका से बातचीत के लिए भी तैयार है और अगर जरूरत पड़ी तो जंग के लिए भी। यह बयान दर्शाता है कि ईरान दबाव में झुकने के मूड में नहीं है। ट्रंप के तीखे शब्दों और ईरान के सख्त रुख के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व एक नए टकराव की ओर बढ़ेगा या फिर आखिरी वक्त में कूटनीतिक रास्ता निकल पाएगा।
2 हजार मौतें, 31 प्रांतों में आग, टैरिफ से बढ़ा वैश्विक दबाव
ईरान में यह विरोध प्रदर्शन देश की बिगड़ती आर्थिक हालत से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार अब तक करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है और 10,700 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि ईरान सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव और बढ़ाते हुए बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अमेरिका के साथ व्यापार करने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। इस फैसले से न सिर्फ ईरान, बल्कि उसके व्यापारिक साझेदार देशों पर भी असर पड़ने की संभावना है। ट्रंप का यह कदम साफ संकेत देता है कि अमेरिका ईरान को हर मोर्चे पर घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है, जबकि ईरान के भीतर चल रहा जनाक्रोश हालात को और विस्फोटक बना रहा है।
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