Tuesday, January 13, 2026

हिंदुओं पर हमलों का सिलसिला थमा नहीं: बांग्लादेश में 19 साल के युवक की मौत, परिवार बोला- ‘पहले बेरहमी से मारा, फिर जहर पिलाया’

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला 19 वर्षीय जॉय महापात्रो का है, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। जॉय को गंभीर हालत में सिलहट स्थित एमएजी ओस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मृतक के परिवार का आरोप है कि जॉय को पहले कुछ लोगों ने बुरी तरह पीटा और फिर जबरन जहर खाने के लिए मजबूर किया। परिवार का कहना है कि हमले के बाद जॉय की हालत तेजी से बिगड़ती चली गई, लेकिन समय पर मदद नहीं मिल सकी। इस घटना के बाद इलाके में डर और आक्रोश का माहौल है, वहीं हिंदू समुदाय में असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है।

धारदार हथियार और गोलियों से हमले

जॉय महापात्रो की मौत से पहले भी बांग्लादेश के अलग-अलग इलाकों से हिंदुओं पर हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल ही में नरसिंदी जिले में 40 वर्षीय मोनी चक्रवर्ती पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह हमला पालाश उपजिला के चारसिंधुर बाजार इलाके में हुआ, जिसने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया। इसी तरह, जेसोर जिले में एक हिंदू व्यवसायी और अखबार के कार्यकारी संपादक की अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। इसके कुछ ही घंटों बाद केशबपुर उपजिला में एक स्कूल शिक्षक के बेटे प्रताप को उनकी आइस फैक्ट्री के बाहर बुलाकर गली में ले जाया गया और गोली मार दी गई। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

18 दिसंबर से शुरू हुआ मौतों का भयावह दौर

बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं का यह सिलसिला पिछले महीने 18 दिसंबर, 2025 को उस वक्त शुरू हुआ, जब मैमनसिंह जिले में कथित ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि कट्टरपंथी भीड़ ने पहले उसे बेरहमी से मारा और फिर उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा की थी। इसके बाद 50 वर्षीय हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास पर हमला किया गया और उन्हें जिंदा जला दिया गया। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती खोकन चंद्र दास की तीन दिन बाद मौत हो गई। इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि हिंसा अब केवल धमकियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि खुलेआम जानलेवा हमलों में बदल चुकी है।

सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था और सरकार

लगातार हो रही इन हत्याओं के बाद बांग्लादेश की कानून व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि वे डर के साये में जीने को मजबूर हैं और कई इलाकों में लोग अपने घर छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। जॉय महापात्रो की मौत केवल एक और आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस गहरी समस्या का संकेत है, जिससे बांग्लादेश का अल्पसंख्यक समाज जूझ रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन घटनाओं पर क्या कार्रवाई करती है और क्या पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिल पाएगा।

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