रात की चीखें, टूटा दरवाजा और बुझ चुकी सांसें… गोरगांव की उस आग में क्या हुआ जिसने पूरे मुंबई को झकझोर दिया?

मुंबई के गोरगांव पश्चिम इलाके में स्थित भगत सिंह नगर, राजाराम लेन के जनता स्टोर्स के पास शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। रात का सन्नाटा अचानक बच्चों की तेज चीखों से टूट गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात करीब डेढ़ बजे के बाद घर के अंदर से मदद की आवाजें आने लगीं। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक एक छोटे से स्लम वाले घर से धुआं और आग की लपटें बाहर निकलने लगीं। यह घर ग्राउंड प्लस एक मंजिला था और बेहद संकरी जगह में बना हुआ था, जिससे आग और तेजी से फैल गई। आसपास रहने वाले लोग घबराकर मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि कोई भी अंदर तक नहीं पहुंच सका।

फायर ब्रिगेड से पहले आम लोग बने राहत की उम्मीद

घटना की सूचना 10 जनवरी 2026 को तड़के 3:06 बजे मुंबई फायर ब्रिगेड को दी गई। लेकिन उससे पहले ही स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया था। लोगों ने बाल्टियों में पानी भरकर आग पर डालना शुरू किया और सबसे पहले इलाके की बिजली आपूर्ति बंद कर दी, ताकि करंट का खतरा न रहे। बताया जा रहा है कि आग मुख्य रूप से ग्राउंड फ्लोर पर इलेक्ट्रिक वायरिंग और घरेलू सामान तक सीमित थी, लेकिन ऊपर पहली मंजिल के एक कमरे में मौजूद लोगों के कपड़ों में आग लग चुकी थी। संकरी गलियों और झोपड़ी वाले इलाके की वजह से फायर ब्रिगेड को मौके तक पहुंचने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

रेस्क्यू के बाद अस्पताल

मुंबई फायर ब्रिगेड के पहुंचते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। आग पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने तीन लोगों को बाहर निकाला और पुलिस वैन तथा निजी वाहन की मदद से तुरंत ट्रॉमा केयर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचते ही ड्यूटी पर मौजूद आरएमओ ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान महिला हर्षदा पावसकर और दो बच्चों कुशल पावसकर व संजोग पावसकर के रूप में हुई है। प्राथमिक जांच में तीनों की मौत जलने की वजह से होने की पुष्टि की गई है। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और पड़ोसी परिवार गहरे सदमे में हैं।

सवालों के घेरे में सुरक्षा, जांच में जुटी पुलिस

इस दर्दनाक हादसे के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। झोपड़ी इलाकों में खराब इलेक्ट्रिक वायरिंग, संकरी गलियां और फायर सेफ्टी के इंतजामों की कमी एक बार फिर सामने आई है। पुलिस और फायर विभाग की टीम मामले की विस्तृत जांच में जुट गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी या इसके पीछे कोई और कारण था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में पहले भी छोटी-मोटी आग की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन कभी ठोस कदम नहीं उठाए गए। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है, वहीं यह हादसा मुंबई की झोपड़पट्टियों में सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल छोड़ गया है।

 

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