बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र देश बनाने की मांग एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तेज होती नजर आ रही है। बलूच नेता मीर यार बलूच लगातार दुनिया के अलग-अलग देशों से समर्थन मांग रहे हैं। भारत के बाद अब उन्होंने इजरायल और अफगानिस्तान (तालिबान सरकार) से खुलकर मदद की अपील की है। मीर यार बलूच का कहना है कि बलूचिस्तान दशकों से पाकिस्तानी दमन, सैन्य कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघनों का शिकार रहा है। उनका आरोप है कि पाकिस्तान बलूच संसाधनों का इस्तेमाल करता है, लेकिन वहां के लोगों को न तो विकास मिलता है और न ही राजनीतिक अधिकार। इसी वजह से अब उन्होंने अपने आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की रणनीति अपनाई है, ताकि पाकिस्तान पर वैश्विक दबाव बनाया जा सके।
इजरायल को क्यों दिखाया गया रणनीतिक फायदा
मीर यार बलूच ने इजरायल के विदेश मंत्री को लिखे खुले पत्र में पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थक देश बताया है। उन्होंने कहा कि हमास जैसे आतंकी संगठनों को पाकिस्तान का अप्रत्यक्ष समर्थन और ईरान समर्थित चरमपंथी धुरी के साथ उसका गठजोड़ पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। मीर यार के अनुसार, अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग होता है तो इससे पाकिस्तान की आतंकवाद “एक्सपोर्ट” करने की क्षमता को गहरा झटका लगेगा। उन्होंने इजरायल को यह भी समझाने की कोशिश की कि एक स्वतंत्र बलूचिस्तान अरब सागर से लेकर मध्य एशिया तक सुरक्षित समुद्री और व्यापारिक रास्ते खोल सकता है, जो इजरायल के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक हितों के अनुकूल होगा।
अफगानिस्तान को दिया गया ऐतिहासिक और आर्थिक तर्क
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर मुत्तकी को लिखे पत्र में मीर यार बलूच ने भावनात्मक और ऐतिहासिक तर्कों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते आधुनिक सीमाओं से बहुत पहले के हैं। दोनों क्षेत्रों के लोग सदियों से व्यापार, संस्कृति और सामाजिक संबंधों से जुड़े रहे हैं। मीर यार का दावा है कि अगर बलूचिस्तान आज़ाद होता है तो अफगानिस्तान को अरब सागर तक सीधी और सुरक्षित समुद्री पहुंच मिल सकती है। इससे अफगानिस्तान मध्य एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप तक अपने व्यापार को बिना किसी बाधा के बढ़ा सकता है। यह प्रस्ताव तालिबान सरकार के लिए आर्थिक रूप से आकर्षक माना जा रहा है, क्योंकि अफगानिस्तान लंबे समय से समुद्री रास्ते की कमी से जूझ रहा है।
भारत, अलग सेना और पाकिस्तान की बढ़ती चिंता
भारत पहले ही बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा चुका है, जिसके बाद मीर यार बलूच ने भारत से भी समर्थन की अपील की थी। अब इजरायल और अफगानिस्तान को जोड़कर उन्होंने पाकिस्तान को तीन दिशाओं से घेरने की कोशिश तेज कर दी है। मीर यार बलूच ने अलग बलूच सेना बनाने का ऐलान भी किया है, जिससे पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई है। जानकार मानते हैं कि यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ बलूचिस्तान की आज़ादी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की भू-राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की स्थिति में बलूच आंदोलन को नई वैधता मिल सकती है।
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