Wednesday, January 14, 2026

क्या एक क्रैश ने तोड़ दी 42 साल की मेहनत? दुबई में तेजस हादसे के बाद उठे बड़े सवाल!

 

21 नवंबर 2025—एक ऐसा दिन जो भारतीय रक्षा इतिहास में अचानक गहरी चोट की तरह दर्ज हो गया। दुबई एयर शो के दौरान जब देश की उम्मीदों को पंख देने वाला स्वदेशी फाइटर जेट तेजस जमीन से टकराकर पल भर में आग का गोला बन गया, तो सिर्फ एक विमान नहीं गिरा… बल्कि 42 साल की लगातार मेहनत, शोध, संघर्ष और सपनों का भार भी मिट्टी में मिलता नजर आया। दुनियाभर के कई देश अपनी एयर फ्लीट में तेजस को शामिल करने की कतार में खड़े थे, और यह भारत के एविएशन सेक्टर के लिए सबसे अहम मोड़ माना जा रहा था। लेकिन हादसे के बाद जो धुआं उठा, उसने सिर्फ एक विमान को नहीं निगला… उसने ऐसे सवाल भी छोड़ दिए जिनका जवाब आने वाले दिनों में भारत की रणनीतिक दिशा तय करेगा। क्या तेजस के भविष्य पर इस दुर्घटना की परछाईं पड़ेगी? क्या दशकों की मेहनत से तैयार इस लड़ाकू विमान का विश्वास दुनिया फिर उसी तरह स्वीकार करेगी? इसी रहस्य और चिंता के बीच तेजस की वह लंबी यात्रा सामने आती है जिसकी शुरुआत एक पुराने सैन्य संकट से हुई थी।

1983 से 2025, कैसे जन्मा भारत का सबसे बड़ा एयर पावर सपना

तेजस की कहानी किसी एक प्रोजेक्ट की नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की जिद की है। 1983 में जब सरकार ने MiG-21 जैसे पुराने हो चुके विमानों को बदलने की योजना बनाई, तो पहली बार महसूस हुआ कि भारत को किसी और पर निर्भर रहने के बजाय अपना लड़ाकू विमान खुद बनाना चाहिए। 1984 में ADA की स्थापना और फिर 1986 में प्रोजेक्ट के पहले फेज के लिए 575 करोड़ रुपये की मंजूरी ने इस सपने को ढांचा देना शुरू किया। तेजस का नाम 1990 में तय हुआ—एक ऐसा नाम जो भारतीय वायुशक्ति की चमक, गति और क्षमता का प्रतीक माना गया।

90 के दशक में टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर और प्रोटोटाइप ने उड़ानें भरीं, और 2001 में TD-1 की पहली सफल फ्लाइट ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत अब सिर्फ सिस्टम खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अपना फाइटर जेट खुद डिजाइन करने की क्षमता भी रखता है। यही वह मुकाम था जहां तेजस सिर्फ एक रक्षा परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गया। 2011 में IOC मिलने के बाद वायुसेना ने तेजस को अपनाने की प्रक्रिया शुरू की और 2016 में ‘फ्लाइंग डैगर्स’ स्क्वाड्रन के साथ तेजस आधिकारिक तौर पर IAF का हिस्सा बन गया।

MK1A, नेवी वेरिएंट और भविष्य की उड़ान

तेजस का सफर 2019 में एक और ऐतिहासिक क्षण से गुज़रा जब इसके नेवी वेरिएंट ने INS विक्रमादित्य पर सफल लैंडिंग की, यह उपलब्धि भारत के लिए इतने बड़े महत्व की थी कि कई देशों ने अपनी नौसेना परियोजनाओं में तेजस प्लेटफॉर्म को देखने की इच्छा जताई। 2021 में सरकार ने 73 तेजस MK1A और 10 ट्रेनर जेट का 48,000 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सौदा मंजूर किया, जिससे यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा स्वदेशी सैन्य एविएशन अनुबंध बन गया। MK1A संस्करण को AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और मिड-एयर रिफ्यूलिंग जैसी उन्नत तकनीकों के साथ बनाया गया, जो इसे आधुनिक लड़ाकू विमानों की लीग में खड़ा करता है।

2024–2025 तक भारत IAF को MK1A की डिलीवरी शुरू करने ही वाला था, जबकि दूसरी ओर तेजस MK2 और पांचवीं पीढ़ी के AMCA जैसी अगली पीढ़ी की परियोजनाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही थीं। लेकिन दुबई एयर शो में हुए हादसे ने इस उभरती हुई रफ्तार के सामने अचानक एक बड़ा ब्रेक लगा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हादसे की तकनीकी जांच और उससे जुड़े परिणाम ही आने वाले महीनों में तय करेंगे कि तेजस की वैश्विक प्रतिष्ठा सुरक्षित रहती है या भारत को अपने सबसे महत्त्वपूर्ण एविएशन सपने के लिए एक बार फिर भरोसा जुटाने की लड़ाई लड़नी होगी। क्या तेजस इस झटके के बाद पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वापसी करेगा? यही वह सस्पेंस है जिसने आज पूरे एयरोस्पेस जगत की निगाहें भारत की ओर टिकाकर रखी हैं।

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