Tuesday, February 10, 2026

Navratri Kanya Pujan 2023: किस दिन करना चाहिए कन्या पूजन अष्टमी या नवमी? जानिए सही डेट, मुहूर्त और विधि

Navratri Kanya Pujan 2023: शारदीय नवरात्रि खत्म होने में कुछ ही दिन बचे हैं। बता दें 21 अक्टूबर को महासप्तमी, 22 अक्टूबर को महाअष्टमी और 23 अक्टूबर को महानवमी है। वहीं 24 अक्टूबर 2023 को विजयादशमी पर मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन होगा। माना जता है कि नवरात्रि में कन्या पूजन नहीं किया तो आपका उपवास अधूरा माना जाएगा। कन्या पूजा में छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन और उन्हें भोजन कराने के बाद ही व्रत-पूजा संपन्न होती है। इन बालिकाओं को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। जानिए इस वर्ष कन्या पूजन की डेट, मुहूर्त और महत्व।

कब करें अष्टमी या नवमी कन्या पूजा ? (Kab Kare Kanya Puja)

शास्त्रों के मुताबिक वैसे तो नवरात्रि के 9 दिन पूरे होने पर ही कन्या पूजन किया जाता है और उसके बाद ही व्रत पारण किया जाता है मगर जो लोग अष्टमी पर अपनी कुलदेवी का पूजन करते हैं वह महाष्टमी पर कन्या पूजन कर सकते हैं। नवरात्रि में अष्टमी-नवमी दोनों दिन मुख्य माना जाता है। कन्या पूजा करने से देवी माँ बेहद प्रसन्न होती हैं और अन्न-धन्य के भंडार भरती हैं।

महाष्टमी कन्या पूजा का शुभ मुहूर्त 2023 ( kanya pujan 2023 Mahashtami Muhurat)

दुर्गाष्टमी की यानि अश्विन शुक्ल महाष्टमी शुरुआत 21 अक्टूबर 2023 को रात 09.53 मिनट से 22 अक्टूबर 2023 को रात 07.58 मिनट तक रहेगी। माना जाता है कि कन्या पूजन के लिए सुबह या दोपहर का मुहूर्त शुभ होता है।
सुबह का मुहूर्त – सुबह 07.51 – सुबह 10.41
दोपहर का मुहूर्त – दोपहर 01.30 – दोपहर 02.55

महानवमी कन्या पूजा 2023 मुहूर्त (kanya pujan 2023 MahaNavami Muhurat)

अश्विन शुक्ल महानवमी यानि दुर्गानवमी तिथि 22 अक्टूबर 2023 को रात 07.58 से 23 अक्टूबर 2023 को शाम 05.44 तक रहेगी।

सुबह का मुहूर्त – सुबह 06.27 – सुबह 07.51 तक रहेगी।
दोपहर का मुहूर्त – दोपहर 1.30 – दोपहर 02.55 तक रहेगी।

जानें कन्या पूजन की विधि (Kanya pujan ki Vidhi)

जिस दिन अष्टमी या नवमी कन्या पूजा कर रहे हैं उस दिन सम्मान पूर्वक 2-10 साल तक की 9 कन्याओं और एक बालक को आमंत्रित जरूर करें। जिस समय कन्या घर पर पधारती हैं, तो स्वागत करते हुए उनके चरण धोएं और उन्हें उचित स्थान पर जरूर बैठाएं। साथ ही कन्याओं के माथे पर अक्षत और कुमकुम भी लगाएं। फिर चुनरी ओढ़ाएं और भोजन कराएं। भोजन के बाद कन्याओं को अपनी सामर्थ्य मुताबिक दक्षिणा या उपहार दें और पैर छूकर आशीर्वाद लें। इसके बाद उन्हें सम्मान के साथ विदा करें। फिर आप भोग का प्रसाद खाएं।

क्या खिलाना चाहिए – कन्या पूजा के समय काले चने की सब्जी, खीर, पूड़ी, हलवा का भोग लगाया जाता है।
कितनी बालिका होनी चाहिए – 9 कन्याएं, 1 बालक (बालक को बटुक माना जाता है)।
क्या दें उपहार – लाल रंग के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, नारियल, मिठाई, शिक्षा से जुड़ी सामग्री दे सकते हैं।

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