उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन उस वक्त चर्चा में आ गया जब जल जीवन मिशन की बदहाल स्थिति को लेकर सपा विधायक फहीम इरफान और योगी सरकार के मंत्री के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। विधायक ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि टेंडर मिलने के बाद ठेकेदारों ने सड़कों को तोड़कर टंकियां बना दीं, लेकिन काम की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि कई जगह पानी की टंकियां गिर गईं। विधायक ने सीतापुर, अयोध्या, बरेली और मथुरा जैसे जिलों का हवाला देते हुए कहा कि इन घटनाओं में कुछ लोगों की जान तक चली गई, तो फिर मुआवजा कौन देगा – सरकार या ठेकेदार?
“आप सच कह रहे हैं तो बीवी की कसम खाएं!” – मंत्री का तीखा पलटवार
विधायक की बात सुनते ही सदन में माहौल गरमा गया। जल शक्ति विभाग से जुड़े मंत्री ने सपा विधायक के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि “अगर आप जो कह रहे हैं, वह सच है तो अपनी बीवी की कसम खाकर कहिए।” मंत्री के इस बयान पर सदन में कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया और फिर जोरदार शोरगुल शुरू हो गया। विपक्षी दलों ने इसे असंवेदनशील टिप्पणी बताया और नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, मंत्री अपने बयान पर अडिग रहे और कहा कि विपक्ष बेबुनियाद आरोपों से जनता को गुमराह कर रहा है।
कौन देगा मुआवजा? सरकार या ठेकेदार?
इस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं की ज़मीनी सच्चाई क्या है। जिन टंकियों के गिरने की बात कही गई, क्या वाकई उनकी जांच हुई? और अगर जानें गईं, तो जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई? सपा विधायक की मांग है कि सरकार तत्काल हाई लेवल जांच बैठाए और मुआवजा प्रक्रिया स्पष्ट करे। वहीं सरकार का पक्ष है कि जिन जगहों पर गड़बड़ी मिली है, वहां कार्रवाई हो रही है। लेकिन “बीवी की कसम” वाले बयान ने सदन में राजनीति का पारा और भी चढ़ा दिया है।
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