बिहार में नई सरकार बनने के बाद अब सबकी नजरें मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar से मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर Amit Shah से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस अहम बैठक के बाद ही मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 7 मई के आसपास मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहीं से यह तय होगा कि सरकार किन चेहरों के साथ आगे बढ़ेगी।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर खास फोकस
इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में केवल पद भरने का काम नहीं होगा, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाएंगे। Bharatiya Janata Party पहली बार बिहार में मुख्यमंत्री पद पर है, इसलिए पार्टी चाहती है कि हर वर्ग और इलाके को प्रतिनिधित्व मिले। यही वजह है कि नए चेहरों को भी मौका दिए जाने की चर्चा है। साथ ही कुछ अनुभवी नेताओं को शामिल कर प्रशासनिक अनुभव को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है। माना जा रहा है कि महिला और युवा नेताओं को भी जगह देकर एक नया संदेश देने की कोशिश की जाएगी।
बीजेपी के 7 नाम चर्चा में, JDU भी कर रही मंथन
बीजेपी की ओर से जिन नामों पर चर्चा चल रही है, उनमें Dilip Jaiswal, Mangal Pandey, Nityanand Rai, Sanjay Jaiswal, Nitish Mishra, Janak Ram और Neeraj Kumar Bablu प्रमुख बताए जा रहे हैं। वहीं Janata Dal United भी अपने संभावित मंत्रियों को लेकर मंथन कर रही है। पार्टी अनुभव को ध्यान में रखते हुए Ashok Choudhary, Lesi Singh और Shravan Kumar को बरकरार रख सकती है। साथ ही कुछ नए चेहरों को शामिल करने की भी संभावना जताई जा रही है।
सहयोगी दलों की भूमिका भी होगी अहम
मंत्रिमंडल विस्तार में सहयोगी दलों की भागीदारी भी अहम मानी जा रही है। Lok Janshakti Party (Ram Vilas) की ओर से संजय सिंह का नाम चर्चा में है, जबकि Hindustani Awam Morcha से Santosh Kumar Suman का नाम लगभग तय माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विस्तार सिर्फ संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि सरकार की दिशा तय करने के लिए भी अहम होगा। खासकर कानून-व्यवस्था, रोजगार, उद्योग और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में नई प्राथमिकताएं तय की जा सकती हैं। अब सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां से यह साफ होगा कि बिहार की राजनीति में आगे क्या नया मोड़ आने वाला है।







