अस्पताल में विधायक के बेटे की मौत, परिजनों ने लगाया जानलेवा लापरवाही का आरोप – क्या छुपा रहा अस्पताल?

बिहार के नवादा जिले में जनता दल यूनाइटेड (JDU) की विधायक विभा देवी और पूर्व राज्य मंत्री राजबल्लभ प्रसाद के बेटे अखिलेश कुमार की दर्दनाक मौत ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। परिवार ने सीधे धर्मशीला देवी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही और पैसे के लालच के कारण उनकी मौत होने का आरोप लगाया है। इस मामले में मुफस्सिल थाना में अस्पताल और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए समेत अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।

अखिलेश कुमार को 19 मार्च 2026 को सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार के अनुसार, अस्पताल पहुँचने पर वे होश में थे और अपनी स्थिति समझा पा रहे थे, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता और समय पर उचित इलाज नहीं मिलने से उनकी स्थिति गंभीर हो गई।

अस्पताल में 7 घंटे की खौफनाक देरी और वेंटिलेटर की कमी

परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने लगभग सात घंटे तक अखिलेश को रोके रखा, जबकि दोपहर 1 बजे जांच में उनकी आंतरिक गंभीर चोट और खून का थक्का जमने की स्थिति स्पष्ट हो चुकी थी। बावजूद इसके, अस्पताल ने उन्हें तुरंत उचित उपचार नहीं दिया और वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस की व्यवस्था भी नहीं की।

नतीजा यह हुआ कि अखिलेश को नालंदा से पटना रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल पर जानबूझकर देरी करके केवल पैसों की मांग का आरोप लगाया। पूर्व श्रम मंत्री राजबल्लभ प्रसाद ने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि बिहार के निजी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और मेडिकल व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करता है।

एफआईआर और जांच का सिलसिला शुरू

परिवार ने नवादा के मुफस्सिल थाना में अस्पताल के मालिक, प्रशासक और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। मुख्य साक्ष्यों में अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, एक्स-रे रिपोर्ट और रेफरल दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस ने जांच के तहत अस्पताल से सीसीटीवी फुटेज की मांग कर ली है और मामले की जांच लगातार जारी है।

इस घटना ने अस्पतालों में उपचार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवादा विधायक विभा देवी और अन्य जनप्रतिनिधियों ने मामले में अपने बयान दर्ज कराए और अस्पताल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गया। लोगों ने अस्पताल के बाहर “हत्यारा अस्पताल” के नारे लगाकर न्याय की मांग की।

बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता सवाल

अखिलेश कुमार की मौत न केवल परिवार के लिए एक बड़ी त्रासदी है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की लापरवाही से मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है और बिहार में निजी अस्पतालों में रेफरल, इमरजेंसी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की व्यवस्था पर गंभीर सुधार की आवश्यकता है।

पुलिस ने अस्पताल के कर्मचारियों और मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई में सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है। इस घटना के बाद बिहार के अन्य जिलों में भी अस्पतालों की जांच और चिकित्सा गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है।

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