Sunday, January 4, 2026

IRCTC केस में बड़ा मोड़! राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के खिलाफ लालू यादव पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट, अब आगे क्या होगा?

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कथित IRCTC घोटाले में निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों के खिलाफ अब दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में लालू यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए थे। इसी आदेश को चुनौती देते हुए लालू यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। यह याचिका सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है। इस याचिका के जरिए लालू यादव ने आरोप तय किए जाने की वैधता और आधार पर सवाल खड़े किए हैं। अब इस मामले में सबकी निगाहें हाई कोर्ट के रुख पर टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आगे की कानूनी कार्रवाई पर पड़ेगा।

राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की बढ़ी मुश्किलें

इस IRCTC मामले में केवल लालू प्रसाद यादव ही नहीं, बल्कि उनका परिवार भी कानूनी घेरे में है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे और राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय किए हैं। अदालत के अनुसार, इस पूरे मामले में कई लोगों की मिलीभगत सामने आई है। आरोप है कि सरकारी प्रक्रिया को दरकिनार कर कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया। कोर्ट ने माना कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश हो सकती है, जिसमें कई लोग शामिल थे। यही वजह है कि इस केस को राजनीतिक के साथ-साथ कानूनी रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

टेंडर शर्तों में हेरफेर का आरोप

स्पेशल जज विशाल गोगने की कोर्ट ने आरोप तय करते समय कहा था कि जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे, तब उन्होंने अपने पद का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया। अदालत के मुताबिक, IRCTC के पटना और पुरी स्थित होटलों के टेंडर से जुड़ी पात्रता शर्तों में जानबूझकर बदलाव किए गए, ताकि कुछ पसंदीदा निजी कंपनियों को इसका लाभ मिल सके। कोर्ट ने यह भी माना कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और नियमों को इस तरह बदला गया जिससे सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग हो। अदालत ने अपने आदेश में यह साफ किया कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू यादव इस पूरी निर्णय प्रक्रिया से अवगत थे और इसमें उनकी भूमिका सक्रिय रही।

जमीन और शेयर के बदले होटल टेंडर का आरोप

यह मामला साल 2017 में तब सामने आया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने IRCTC घोटाले को लेकर एफआईआर दर्ज की। CBI के अनुसार, पटना और पुरी के IRCTC होटलों के टेंडर कुछ खास निजी पार्टियों को देने के बदले आरोपियों को जमीन और शेयर के रूप में कथित तौर पर रिश्वत दी गई। जांच के बाद CBI ने लालू प्रसाद यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच चुका है। हाई कोर्ट में यह तय किया जाएगा कि निचली अदालत का आदेश बरकरार रहेगा या आरोपों पर पुनर्विचार किया जाएगा। इस फैसले का न केवल लालू यादव बल्कि पूरे मामले से जुड़े सभी आरोपियों के राजनीतिक और कानूनी भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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