बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या अब वह मुख्यमंत्री पद छोड़ने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में उनके कार्यक्रम केवल शपथ तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ अहम बैठकें भी होंगी। इन बैठकों में बिहार के राजनीतिक भविष्य और नई सरकार के गठन को लेकर रणनीति तय की जा सकती है। यही वजह है कि अगले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।
रोहिणी आचार्य का तीखा हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए नीतीश कुमार को “मौकापरस्त” बताते हुए कटाक्ष किया। रोहिणी ने एक पोस्ट में लिखा, “बनकर भीगी बिल्ली, चाचा चले गए आज दिल्ली…”। उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में बार-बार पाला बदलने की कीमत चुकानी ही पड़ती है और अब नीतीश कुमार को इसका सामना करना पड़ रहा है। उनके बयान से साफ है कि विपक्ष इस मौके को राजनीतिक रूप से भुनाने में जुटा है। रोहिणी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में नीतीश का सत्ता से नाता टूट सकता है, जिससे सियासी माहौल और भी गरमा गया है।
दिल्ली में बैठकों का दौर, नए सीएम पर मंथन
दिल्ली में होने वाली बैठकों को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हो सकते हैं, के साथ रणनीतिक चर्चा होगी। इस बैठक में बिहार भाजपा के प्रमुख नेता और उपमुख्यमंत्री स्तर के चेहरे भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि इसी दौरान नए मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बनाई जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह फैसला जल्द होता है, तो बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी हो सकती है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि सत्ता के अंदर ही अंदर बड़ा बदलाव तय हो चुका है, बस औपचारिक घोषणा बाकी है।
14 अप्रैल के बाद बदल सकता है पूरा समीकरण
सूत्रों के अनुसार, 14 अप्रैल के आसपास नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके तुरंत बाद एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित होगा। वहीं, यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल, सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली बैठकों और आगामी फैसलों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
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