केरल में कांग्रेस की वापसी तय? 100 सीटों का दावा, CM नाम पर चुप्पी क्यों?

केरल विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए सत्ता में वापसी का भरोसा जताया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्य की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि केरल के लोगों ने हमेशा शिक्षा, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का समर्थन किया है, और एक बार फिर वही जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उनका यह बयान चुनावी माहौल में कांग्रेस के आत्मविश्वास को दर्शाता है। खरगे ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी को जनता से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इस बार परिणाम कांग्रेस के पक्ष में जा सकते हैं। उनके बयान को राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे साफ होता है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सत्ता परिवर्तन को लेकर गंभीर और आश्वस्त नजर आ रहा है।

यूडीएफ का बड़ा दावा—100 से ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद

वहीं, केरल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पेरावूर सीट से उम्मीदवार सनी जोसेफ ने भी मतदान के बाद मीडिया से बातचीत में बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) इस बार बहुमत से सरकार बनाएगा और 100 से अधिक सीटें जीत सकता है। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि वही रुझान विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा। सनी जोसेफ ने जनता से अपील की कि वे अपने मताधिकार का सही इस्तेमाल करें और मौजूदा सरकार की नीतियों के खिलाफ वोट दें। हालांकि जब मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ किया कि इस पर अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के साथ विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। इससे यह साफ है कि कांग्रेस अभी CM फेस को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती।

मतदान जारी, लाखों मतदाता कर रहे भविष्य का फैसला

केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है और शाम 5 बजे तक चलेगा। केरल में कुल 140 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं, जहां 883 उम्मीदवार मैदान में हैं। यानी हर सीट पर औसतन 6 से 7 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य में करीब 27 लाख मतदाता हैं, जो 30,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर अपने वोट का इस्तेमाल कर रहे हैं। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे साफ है कि लोगों में लोकतंत्र के इस पर्व को लेकर उत्साह है। कई जगहों पर निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों के कारण मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है, जिससे चुनावी परिणाम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

नतीजों से पहले सियासी हलचल तेज

चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे, लेकिन उससे पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस जहां जीत का दावा कर रही है, वहीं अन्य दल भी अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में डटे हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कांग्रेस या यूडीएफ सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इस मुद्दे पर पार्टी ने अभी तक कोई स्पष्ट चेहरा सामने नहीं रखा है, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी और हाईकमान की भूमिका इसमें निर्णायक रहेगी। फिलहाल, केरल की जनता के वोट से ही तय होगा कि राज्य में सत्ता किसके हाथों में जाएगी।

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