असम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस को एक बार फिर बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। राज्य की 126 सीटों में से BJP ने 102 सीटें जीतकर मजबूत वापसी की, जबकि Indian National Congress सिर्फ 21 सीटों पर सिमट गई। यह प्रदर्शन पिछले चुनावों से भी कमजोर माना जा रहा है, जिससे पार्टी के भीतर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। लगातार दो चुनावों में खराब प्रदर्शन ने संगठन की रणनीति और नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जितेंद्र सिंह ने ली हार की जिम्मेदारी
इस हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम के प्रभारी महासचिव Jitendra Singh ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा सौंपते हुए साफ कहा कि वे चुनावी परिणामों की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने माना कि पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई, जिसके चलते यह नतीजे सामने आए।
इस्तीफे में क्या कहा गया?
अपने इस्तीफे में जितेंद्र सिंह ने लिखा कि असम में कांग्रेस को जनता का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पूरी मेहनत की, लेकिन फिर भी जनता का विश्वास जीतने में सफल नहीं हो पाए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी थी, उसके लिए वह आभारी हैं और वे आगे भी पार्टी के लिए किसी न किसी रूप में काम करते रहेंगे। उनका यह पत्र सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया, जिससे यह मामला और चर्चा में आ गया।
Respected Shri @kharge ji,
I write to tender my resignation as General Secretary In-Charge of Assam with immediate effect.
The recent election results have been deeply disappointing, and I take full responsibility for my role in the outcome. Despite our best efforts, we were… pic.twitter.com/1LYzx9zbMD— Jitendra Singh Alwar (@JitendraSAlwar) May 4, 2026
लगातार खराब प्रदर्शन ने बढ़ाई चिंता
यह पहला मौका नहीं है जब Jitendra Singh के नेतृत्व में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को करारी हार मिली थी। लगातार चुनावी असफलताओं के कारण पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब कांग्रेस को अपने नेतृत्व और जमीनी रणनीति दोनों पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की जरूरत है।
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