झारखंड की राजनीति में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन को नगड़ी में आयोजित एक किसान कार्यक्रम से पहले अचानक हाउस अरेस्ट कर लिया गया। यह कार्यक्रम किसानों की जमीन की रक्षा और सरकार की भूमि नीति के विरोध में आयोजित किया गया था। चंपाई सोरेन इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले थे, लेकिन कार्यक्रम स्थल पहुंचने से पहले ही उन्हें उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया। इस कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
सोशल मीडिया पर चंपाई सोरेन का बड़ा दावा
चंपाई सोरेन ने इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा कि यह सरकार की दमनकारी कार्रवाई है और लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है और वह इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर समर्थकों की ओर से प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और कई नेताओं ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
नगड़ी के आदिवासी/ मूलवासी किसानों की आवाज उठाने से रोकने के लिए झारखंड सरकार ने आज सुबह से मुझे हाउस अरेस्ट कर लिया है।
— Champai Soren (@ChampaiSoren) August 24, 2025
राजनीतिक हलकों में गरमाई बहस
इस घटनाक्रम से झारखंड की राजनीति में तनाव का माहौल बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंपाई सोरेन को नजरबंद करने का फैसला सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि इससे विपक्ष को जनता के बीच सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का मौका मिल गया है। वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा किस तरह तूल पकड़ता है और सरकार की अगली रणनीति क्या होती है।
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