बारामती में पवार परिवार के किले पर बड़ा खतरा! जानें कौन है सुनेत्रा पवार को चुनौती देने वाले आकाश मोरे?

महाराष्ट्र की बारामती सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। यह सीट लंबे समय से पवार परिवार का गढ़ मानी जाती रही है। इस बार कांग्रेस ने अचानक आकाश मोरे को उम्मीदवार घोषित कर राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। सुनेत्रा पवार, जो महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और NCP की अध्यक्ष हैं, इस बार भी बारामती से मैदान में हैं। कांग्रेस की ओर से आकाश मोरे की घोषणा ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं और पवार परिवार के पारंपरिक गढ़ में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना को बढ़ा दिया है।

आकाश मोरे कौन हैं?

आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति के सचिव भी हैं। उनके पास पहले से राजनीतिक अनुभव है। 2014 में उन्होंने अजित पवार के खिलाफ कांग्रेस की टिकट पर बारामती विधानसभा चुनाव में भाग लिया था। हालांकि, उन्हें उस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था और 4,013 वोट मिले थे। अब वह कांग्रेस की ओर से सुनेत्रा पवार के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। आकाश मोरे के पास राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ बारामती से जुड़ा पारिवारिक कनेक्शन भी है, जो उन्हें स्थानीय मतदाताओं के बीच पहचान दिलाने में मदद करेगा।

पिता विजयराव मोरे का राजनीतिक सफर

आकाश मोरे के पिता, विजयराव मोरे भी राजनीति से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पहले समाजवादी पार्टी की ओर से शरद पवार के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। 1990 में शरद पवार ने उन्हें कांग्रेस में शामिल किया और विधान परिषद का सदस्य बनाया। हालांकि 1999 में जब शरद पवार ने NCP की स्थापना की, तब विजयराव मोरे कांग्रेस में ही रहे और उनके साथ अलग राह अपनाई। वर्तमान में 86 वर्षीय विजयराव मोरे सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे के लिए सक्रिय हैं और बारामती उपचुनाव में उनका समर्थन कर रहे हैं।

बारामती में मुकाबला होगा दिलचस्प

बारामती उपचुनाव में कांग्रेस और NCP के बीच मुकाबला दर्शकों और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण होगा। सुनेत्रा पवार के पास लंबे समय से यह सीट होने के बावजूद आकाश मोरे की चुनौती से चुनाव रोचक और चुनौतीपूर्ण बन गया है। कांग्रेस ने उन्हें स्थानीय मुद्दों और राजनीतिक अनुभव के आधार पर मैदान में उतारा है। अब देखना होगा कि क्या पवार परिवार का गढ़ बारामती इस बार भी NCP के कब्जे में रहेगा या कांग्रेस की नई रणनीति सफल होती है।

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