मैच फिक्सिंग में ऐसा फंसा ये खिलाड़ी, 2050 तक नहीं खेल पाएगा कोई टूर्नामेंट!

Tennis Match Fixing: टेनिस की दुनिया में मैच फिक्सिंग के एक बड़े मामले ने खेल की ईमानदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय टेनिस इंटीग्रिटी एजेंसी (ITIA) ने स्टीफन मिलीसेविच पर 24 साल का प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही खिलाड़ी पर 70 हजार अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भी लगाया गया है। यह कार्रवाई मैच फिक्स करने और दूसरे खिलाड़ियों को कथित भ्रष्ट नेटवर्क से जोड़ने के आरोपों के बाद हुई है। प्रतिबंध 9 अक्टूबर 2026 से लागू होकर अक्टूबर 2050 तक चलेगा। इस फैसले के बाद मिलीसेविच पेशेवर टेनिस में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि जांच के दौरान खिलाड़ी ने एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया।

छह मैचों में फिक्सिंग के आरोप

स्टीफन मिलीसेविच पर आरोप है कि उन्होंने छह टेनिस मैचों को फिक्स करने में भूमिका निभाई, जिनमें से पांच मुकाबलों में वह खुद खेले थे। इसके अलावा, 2022 से 2024 के बीच छह अन्य मैचों को प्रभावित करने की योजना से जुड़े आरोप भी सामने आए। जांच एजेंसी के मुताबिक, खिलाड़ी पर दूसरे टेनिस खिलाड़ियों को भी कथित भ्रष्ट नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश का आरोप है। मिलीसेविच अगस्त 2013 में अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 1338 पर पहुंचे थे। हालांकि, मैच फिक्सिंग जैसे मामलों में कार्रवाई का उद्देश्य खेल प्रतियोगिताओं को निष्पक्ष बनाए रखना और खिलाड़ियों के बीच भरोसा कायम रखना है। इस मामले में लगाए गए आरोपों और एजेंसी के फैसले ने टेनिस जगत में अनुशासन को लेकर फिर चर्चा छेड़ दी है।

 जांच में सहयोग नहीं किया, फिर लगा 24 साल का प्रतिबंध

ITIA के अनुसार, 2026 में मामले की जांच की गई। एजेंसी ने मिलीसेविच से संपर्क करने के सात प्रयास किए, लेकिन उन्होंने जांच में हिस्सा नहीं लिया और न ही सहयोग किया। 24 सितंबर को जांच पूरी होने के बाद उन्हें कथित गंभीर उल्लंघनों के संबंध में नोटिस भेजा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, खिलाड़ी की ओर से इसका जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद एजेंसी ने नियमों के तहत उन पर लंबा प्रतिबंध और आर्थिक जुर्माना लगाया। इस प्रतिबंध के दौरान मिलीसेविच न तो पेशेवर टेनिस खेल सकेंगे और न ही कोचिंग दे पाएंगे। इसके अलावा, ATP, WTA और राष्ट्रीय टेनिस संगठनों से जुड़े आयोजनों में भी उनकी भागीदारी पर रोक रहेगी।

 पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

मैच फिक्सिंग के मामलों में सख्त कार्रवाई का सामना करने वाले खिलाड़ियों में फ्रांस के क्वेंटिन फोलियट का नाम भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 में उन पर 20 साल का प्रतिबंध लगाया गया था। फोलियट 2022 में अपने करियर की सर्वोच्च रैंकिंग 488 पर पहुंचे थे। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने खेल संगठनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है। मैच फिक्सिंग से मुकाबलों की निष्पक्षता प्रभावित होती है और दर्शकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। मिलीसेविच पर लगा प्रतिबंध इस बात का संकेत है कि खेल की अखंडता से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर खिलाड़ियों को लंबे समय तक पेशेवर गतिविधियों से दूर रहना पड़ सकता है।

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