अमेरिका और ईरान के बीच करीब 40 दिनों तक चले तनाव के बाद आखिरकार दो सप्ताह के लिए सीजफायर लागू कर दिया गया है। इस ऐलान के बाद जहां एक ओर दुनिया ने राहत की सांस ली, वहीं दूसरी ओर भारत में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि इस सीजफायर का श्रेय पाकिस्तान को दिया जा रहा है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। राउत के अनुसार, यह स्थिति भारत की वैश्विक भूमिका पर सवाल खड़े करती है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की स्थिति को प्रभावित कर सकती है।
पाकिस्तान को मिला श्रेय, भारत पर सवाल
संजय राउत ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान का जिक्र करना कई मायनों में अहम है। उन्होंने कहा कि जिस देश को अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर बताया जाता है, उसी देश को इस बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते में मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है।
राउत ने यह भी कहा कि भारत ने हमेशा खुद को मजबूत कूटनीतिक ताकत के रूप में पेश किया है, लेकिन इस मामले में उसकी भूमिका स्पष्ट नजर नहीं आई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इतनी बड़ी घटना में भारत की सक्रिय भागीदारी क्यों नहीं दिखी।
सीजफायर के पीछे की कूटनीति
सीजफायर को लेकर कई अहम जानकारियां भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि इस समझौते में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और अन्य देशों की भूमिका रही। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी कई शर्तें तय की गईं, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की ओर से पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व से संपर्क किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय कूटनीति में कई देशों की भागीदारी रही। इसके अलावा चीन का नाम भी इस प्रक्रिया में सामने आ रहा है, जिसने पर्दे के पीछे शांति प्रयासों का समर्थन किया।
आगे की राजनीति और वैश्विक असर
संजय राउत ने आगे कहा कि इस सीजफायर के बाद पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि में बदलाव आ सकता है और उसे नई पहचान मिल सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए भारत की विदेश नीति पर पुनर्विचार की जरूरत है।
सीजफायर से फिलहाल तनाव कम हुआ है, लेकिन यह पूरी तरह स्थायी समाधान नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस समझौते का क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ता है। साथ ही भारत की भूमिका और कूटनीतिक रणनीति भी चर्चा का विषय बनी रहेगी।
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