प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने चिन्मय मिशन से जुड़े संतों, आचार्यों और अनुयायियों को बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि इस आयोजन में शामिल होना उनके लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने इसे संतों के स्नेह और आशीर्वाद से जुड़ा अवसर बताया। प्रधानमंत्री के संबोधन में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विचारों और राष्ट्र निर्माण जैसे विषय प्रमुख रहे।
‘मेरी नीतियों के केंद्र में युवा’, प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
अपने संबोधन में नरेंद्र मोदी ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत और विकसित भारत बनाने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। प्रधानमंत्री ने युवाओं को देश की ताकत बताते हुए कहा कि उनकी नीतियों के केंद्र में युवा हैं। उनके मुताबिक, देश की प्रगति में युवाओं की ऊर्जा, सोच और योगदान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार जैसे मुद्दे युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़े हुए हैं।
भारतीय संस्कृति को दुनिया तक पहुंचा रहे युवा
पीएम मोदी ने चिन्मय मिशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि विचार और मूल्यों से जुड़ा आंदोलन है। उन्होंने बताया कि मिशन से जुड़े कई युवा भारतीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, ऐसे युवा देश की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने रखने में भी योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस प्रयास को भारत की विरासत और विचारों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
राष्ट्र निर्माण और संस्कृति के संबंध पर भी दिया जोर
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में स्वामी चिन्मयानंद के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आध्यात्मिक विषयों के साथ राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर भी विचार रखे। पीएम मोदी ने राष्ट्र को भारतीय संस्कृति और पहचान का आधार बताया। उन्होंने इस विचार पर जोर दिया कि देश को जागरूक और प्रगतिशील बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को योगदान देना चाहिए। उनके संबोधन का संदेश था कि आध्यात्मिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और युवाओं की भागीदारी के मेल से भारत को और मजबूत बनाया जा सकता है।
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