Wednesday, February 25, 2026

सिंगापुर से लौटी ‘मेगा डील’! CM योगी के एक फैसले से जेवर एयरपोर्ट पर बरसेंगे 4458 करोड़, उत्तर भारत की तस्वीर बदलने की तैयारी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के सिंगापुर दौरे का दूसरा दिन प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि लेकर आया। इन्वेस्ट यूपी और Singapore Cooperation Enterprise (SCE) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना और नीतिगत ढांचे को आधुनिक बनाना है। इस समझौते को प्रदेश के प्रशासनिक और आर्थिक ढांचे में दीर्घकालिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

एमओयू के तहत दोनों पक्ष स्टडी विजिट्स, लीडरशिप डेलिगेशन और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इससे सरकारी अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं की कार्यकुशलता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। सिंगापुर अपनी सुव्यवस्थित प्रशासनिक प्रणाली और शहरी विकास मॉडल के लिए जाना जाता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश को नीति निर्माण, शहरी प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और निवेश प्रोत्साहन जैसे क्षेत्रों में सीधे अनुभव और तकनीकी सहयोग का लाभ मिलेगा।

इस समझौते में तकनीकी परियोजनाओं की संयुक्त रूप से तैयारी और उनके क्रियान्वयन का भी प्रावधान है। साथ ही सरकारी और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल और अधिक मजबूत होगा तथा बड़े प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज होगी।

4458 करोड़ का निवेश: जेवर एयरपोर्ट पर दो मेगा प्रोजेक्ट

सिंगापुर दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने एविएशन सर्विस सेक्टर की प्रमुख कंपनी AISATS के साथ भी बड़ा समझौता किया। इस करार के तहत गौतमबुद्ध नगर स्थित Noida International Airport, जिसे आमतौर पर जेवर एयरपोर्ट कहा जाता है, पर दो बड़े प्रोजेक्ट स्थापित किए जाएंगे। इन दोनों परियोजनाओं में कुल 4458 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

पहला प्रोजेक्ट अत्याधुनिक कार्गो कैंपस का निर्माण है। यह कैंपस एयर फ्रेट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में उत्तर भारत का बड़ा केंद्र बनने की क्षमता रखता है। दूसरा प्रोजेक्ट विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचन की स्थापना है, जहां से उड़ानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला भोजन तैयार किया जाएगा। यह निवेश न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा बल्कि हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।

सरकार का कहना है कि इस निवेश से जेवर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। एयरपोर्ट के आसपास इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ होगा।

जेवर बनेगा नॉर्थ इंडिया का कार्गो हब

एमओयू के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट परिसर में बनने वाला कार्गो कैंपस अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा। इसमें कोल्ड स्टोरेज, फार्मा-ग्रेड स्टोरेज, हाई-सिक्योरिटी वेयरहाउसिंग और तेज कस्टम क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, कृषि उत्पाद और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा।

उत्तर प्रदेश पहले से ही देश के बड़े कृषि और औद्योगिक राज्यों में गिना जाता है। लेकिन निर्यात के लिए तेज और भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। कार्गो हब बनने से यह कमी काफी हद तक दूर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निर्यात की लागत कम होगी और समय की बचत होगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

इसके अलावा, जेवर एयरपोर्ट की रणनीतिक लोकेशन भी इसे खास बनाती है। दिल्ली-एनसीआर से नजदीकी और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी इसे लॉजिस्टिक्स के लिहाज से आदर्श बनाती है। आने वाले समय में यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए मुख्य कार्गो गेटवे के रूप में उभर सकता है।

विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचन: उड़ानों को मिलेगा नया स्वाद

एआई सैट्स द्वारा स्थापित की जाने वाली एयर कैटरिंग किचन आधुनिक मशीनों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार संचालित होगी। यहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों के लिए भोजन तैयार करने की क्षमता विकसित की जाएगी। खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और समय पर डिलीवरी को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह किचन केवल जेवर एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर भारत के अन्य एयरपोर्ट्स को भी सेवाएं प्रदान कर सकेगा। इससे क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत सप्लाई चेन विकसित होगी। स्थानीय किसानों और फूड सप्लायर्स को भी इससे अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होगी।

सरकार का मानना है कि ये दोनों प्रोजेक्ट मिलकर जेवर एयरपोर्ट को केवल यात्री सेवा तक सीमित नहीं रहने देंगे, बल्कि इसे एक पूर्ण एविएशन इकोसिस्टम में बदल देंगे। सिंगापुर दौरे में हुए इन समझौतों को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का असर प्रदेश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक निवेश आकर्षण पर साफ दिखाई दे सकता है।

 

Read More-गैस टैंकर पलटा और आग का गोला 50 गाड़ियों को निगल गया! चिली की CCTV में कैद दिल दहलाने वाला मंजर

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img