लोकसभा में परिसीमन बिल 2026 Delimitation Bill 2026 पर चर्चा के दौरान जम्मू-कश्मीर से सांसद Agha Syed Ruhullah Mehdi ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर यह परिसीमन लागू होता है तो देश में राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और छोटे राज्यों की आवाज कमजोर पड़ सकती है। इस चर्चा के दौरान सदन में माहौल काफी गर्म हो गया और कई बार तीखी बहस देखने को मिली। यहां तक कि गृह मंत्री Amit Shah ने भी उनके बयान पर आपत्ति जताई, जिससे सदन में तनाव और बढ़ गया।
“बड़े राज्य तय करेंगे देश की दिशा” — विपक्ष की बड़ी आशंका
आगा रुहुल्ला मेहदी ने अपने भाषण में कहा कि नए परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे बड़े राज्यों की लोकसभा सीटें बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं। उनका कहना था कि इससे संसद में शक्ति का संतुलन बिगड़ जाएगा और छोटे राज्यों की राजनीतिक भागीदारी कमजोर हो जाएगी। उन्होंने चिंता जताई कि अगर ऐसा हुआ तो बड़े राज्य मिलकर छोटे राज्यों पर फैसले थोप सकते हैं। मेहदी ने कहा कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत बराबरी का प्रतिनिधित्व है, लेकिन यह बिल उस संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उनके इस बयान ने पूरे सदन में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
“मैं चाहता हूं बंगाल भी कश्मीर बने” — बयान से मचा राजनीतिक तूफान
बहस के दौरान आगा रुहुल्ला मेहदी ने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि “बंगाल भी कश्मीर बने, साउथ भी कश्मीर बने और नॉर्थ ईस्ट भी कश्मीर बने।” उनका इशारा था कि कश्मीर की तरह अन्य राज्यों को भी राजनीतिक असंतुलन और अधिकारों में कमी का अनुभव हो, ताकि देश को समझ आए कि जम्मू-कश्मीर ने क्या झेला है। इस बयान को लेकर सदन में भारी विरोध हुआ और सत्ता पक्ष ने इसे अनुचित करार दिया। विपक्ष ने हालांकि इसे क्षेत्रीय असमानता पर चिंता के रूप में पेश किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
जेरीमेंडरिंग और 370 का मुद्दा भी उठा
अपने भाषण में मेहदी ने आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया में जेरीमेंडरिंग की संभावना हो सकती है, जिससे चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं राजनीतिक फायदे के लिए बदली जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले भी ऐसे बदलावों का असर देखा गया है, जिससे कुछ समुदायों का राजनीतिक प्रभाव कम हुआ। साथ ही उन्होंने 2019 में धारा 370 हटाए जाने Article 370 abrogation का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी स्थानीय सहमति को नजरअंदाज किया गया था। मेहदी ने चेतावनी दी कि अगर संसद में ही छोटे राज्यों की आवाज कमजोर हो गई तो लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। यह पूरा मुद्दा अब देश की राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है।
Read More-शादी कर ली और किसी को भनक तक नहीं! Jubin Nautiyal की सीक्रेट वेडिंग की फोटो ने मचाया तहलका








