Maharashtra News: महाराष्ट्र की राजनीति में रमजान को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Abu Azmi ने मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मांग की है कि रमजान के पवित्र महीने में मुस्लिम सरकारी और अर्धसरकारी कर्मचारियों को शाम 4 बजे तक ही काम करने की अनुमति दी जाए। मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि रमजान मुसलमानों के लिए बेहद अहम महीना होता है। रोजा रखने और नमाज अदा करने वालों को इस दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, ऐसे में सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। आजमी ने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे मिलकर यह अनुरोध किया है और उम्मीद जताई कि सरकार इस पर सकारात्मक विचार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में इस तरह की रियायत दी गई है, इसलिए महाराष्ट्र को भी इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। इस मांग के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और अलग-अलग दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
दूसरे राज्यों का हवाला, विधानसभा सत्र में भी उठेगा मुद्दा
अबू आजमी ने अपने बयान में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में रमजान के दौरान सरकारी कर्मचारियों को शाम 4 बजे तक छुट्टी देने की सुविधा दी गई है, जिससे रोजा रखने वाले कर्मचारियों को राहत मिलती है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी विशेष सुविधा के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए की गई है। आजमी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले विधानसभा सत्र में भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा, ताकि इस पर व्यापक चर्चा हो सके। उनका तर्क है कि जब अन्य राज्य प्रशासनिक स्तर पर यह निर्णय ले सकते हैं, तो महाराष्ट्र सरकार को भी इस दिशा में विचार करना चाहिए। हालांकि सरकार की ओर से अब तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे संवेदनशील मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।
‘द केरल स्टोरी 2’ और लव जिहाद पर तीखी टिप्पणी
रमजान की मांग के साथ-साथ अबू आजमी ने फिल्म The Kerala Story 2 को लेकर भी अपनी राय खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों के जरिए समाज में गलत संदेश जाता है और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। उनके मुताबिक अलग-अलग धर्मों के युवक-युवतियों के बीच विवाह कोई नई बात नहीं है और इसे साजिश की तरह दिखाना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को किसी तरह की समस्या लगती है तो स्पष्ट कानून बनाए, लेकिन फिल्मों के जरिए नफरत फैलाना उचित नहीं है। आजमी ने यह भी कहा कि समाज में सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देने वाली फिल्में बननी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह के मामलों में कानून को अपना काम करने दिया जाए और यदि कोई गलत करता है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। उनके बयान के बाद फिल्म और उससे जुड़े विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
गुजरात कानून और विरोध प्रदर्शन पर भी रखी राय
अबू आजमी ने गुजरात में शादी के लिए माता-पिता की मंजूरी अनिवार्य किए जाने के फैसले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि कोई युवक-युवती विवाह करना चाहते हैं तो परिवार की सहमति लेना एक सकारात्मक कदम हो सकता है। उनके अनुसार इससे सामाजिक संतुलन बना रहता है। वहीं एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है। उन्होंने समाजवादी विचारक Ram Manohar Lohia का हवाला देते हुए कहा कि जब सड़कें शांत हो जाती हैं तो संसद कमजोर पड़ जाती है। उनका मानना है कि विरोध को पूरी तरह से दबाना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है। महाराष्ट्र में रमजान रियायत की मांग, फिल्मों पर बयान और अन्य मुद्दों पर की गई टिप्पणियों ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी है कि क्या सरकार इस मांग को स्वीकार करेगी या इसे प्रशासनिक कारणों से खारिज कर देगी।








