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उत्तर प्रदेश में 2027 की जातीय जनगणना कब से शुरू होगी? पूरी जानकारी, तारीख और सभी सवाल एक जगह!

UP Census 2027: उत्तर प्रदेश में पहले बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना 7 मई से शुरू होगी। जानें कब से होगा मकान सूचीकरण, कब से शुरू होगी जातीय गणना, क्या-क्या सवाल दिए जाएंगे और कैसे होगी डिजिटल प्रक्रिया?

उत्तर प्रदेश में 2027 की जनगणना की तैयारी जोरों पर है और इस बार यह इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पहला चरण 7 मई से 21 मई 2027 तक चलेगा और इस दौरान मुख्य रूप से मकान सूचीकरण तथा उसके डेटा की डिजिटल एंट्री पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

जनगणना अधिकारी और जमात के कर्मचारी इस चरण में घर-घर जाकर सभी मकानों के बारे में विस्तार से जानकारी इकट्ठा करेंगे। मकान के स्थान, निर्माण सामग्री, स्थिति और अन्य कई बुनियादी जानकारियों को मोबाइल ऐप या टैब के माध्यम से रिकॉर्ड किया जाएगा।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस बार की जनगणना में हाथों-हाथ फॉर्म भरने की पारंपरिक प्रक्रिया नहीं रहेगी, बल्कि प्रत्येक जानकारी सीधे डिजिटल सिस्टम में दर्ज की जाएगी। इससे आंकड़ों को सही, तेज और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा जनता को भी स्व-गणना (self-enumeration) का विकल्प दिया गया है, यानी जो लोग चाहें, वे अपना विवरण खुद मोबाइल या वेबसाइट पर पहले से दर्ज कर सकते हैं, फिर अधिकारी उसकी पुष्टि कर सकते हैं।

घर-घर जाकर जनसंख्या तथा जाति की गणना

पहले चरण के बाद 22 मई से 20 जून 2027 तक उत्तर प्रदेश के लगभग हर घर में फील्ड कर्मियों द्वारा दौरा किया जाएगा। इस दौरान मकान सूचीकरण के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा—जनसंख्या और जातीय गणना।

यह चरण राज्य की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक तस्वीर को स्पष्ट रूप से दर्शाएगा। प्रत्येक व्यक्ति से उसके नाम, लिंग, आयु, शिक्षा, धर्म और जाति श्रेणी (सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी) जैसी जानकारी ली जाएगी। यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जातीय जानकारी डिजिटल रूप में इकट्ठा की जाएगी।

सरकार का लक्ष्य है कि 2027 की जनगणना से मिले आंकड़े भविष्य की नीतियों, योजनाओं और संसाधन वितरण के निर्णयों को और अधिक स्पष्ट, समतल और न्यायसंगत बनाएँ। यह जानकारी न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी होगी।

यह ध्यान देने योग्य है कि डिजिटल प्रक्रिया से डेटा की सटीकता, समय की बचत और लोगों के लिए जवाब देने की सुविधा, सब कुछ आसान हो जाएगा।

जनगणना में पूछे जाने वाले अहम सवाल – क्या-क्या देना पड़ेगा जवाब?

जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर लगभग 33 सवाल पूछेंगे, जिनका जवाब हर परिवार को देना अनिवार्य होगा। ये सवाल मकान से लेकर परिवार, संसाधन और तकनीकी सुविधाओं तक विस्तृत रूप से विभाजित हैं।

इन सवालों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:

01. मकान का जनगणना नंबर और मकान का पता
02. मकान की दीवार, छत और फर्श में उपयोग की गई सामग्री
03. मकान का उपयोग और हालत
04. परिवार में सदस्यों की संख्या
05. परिवार के मुखिया का नाम और लिंग
06. जाति श्रेणी
07. मकान का मालिकाना हक
08. पेयजल, बिजली, शौचालय जैसी सुविधाओं की उपलब्धता
09. भोजन के मुख्य ईंधन, गैस कनेक्शन और गंदे पानी का निकास
10. मोबाइल, स्मार्टफोन, टीवी, इंटरनेट, कंप्यूटर आदि
11. साइकिल, मोटरसाइकिल, कार जैसे वाहनों की उपलब्धता
12. मुख्य अनाज और मोबाइल नंबर

ये सवाल घर-घर जाकर अधिकारियों से उत्तर दिए जाएंगे या व्यक्ति स्वयं डिजिटल रूप से पहले दर्ज कर सकता है।

सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट किया है कि कोई भी जानकारी साझा करना वैकल्पिक नहीं होगा और जनगणना प्रक्रिया में सहयोग करना नागरिकों की जिम्मेदारी मानी जाएगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण और तैनाती

उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया है कि लगभग छह लाख से अधिक कर्मचारियों की तैनाती जनगणना के लिए की जाएगी। इन अधिकारियों को पहले ही विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा चुका है ताकि वे डिजिटल उपकरणों, ऐप और प्लेटफॉर्म का सही उपयोग कर सकें।

एक नोडल कार्यालय भी राज्य स्तर पर स्थापित किया जाएगा, जो डेटा संग्रह, सत्यापन और निगरानी की प्रक्रिया को नियंत्रित करेगा। इसके अलावा मंडल, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष बनाये गए हैं।

हर अधिकारी के पास टैब, मोबाइल ऐप और शिक्षण सामग्री उपलब्ध होगी जिससे डेटा की गुणवत्ता उच्चतम स्तर पर रहे। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि डिजिटल उपकरणों की वजह से ग्रामीण इलाकों में डेटा संग्रह के दौरान किसी तरह की समस्या न आए।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि डिजिटल जनगणना से डेटा की तेज़, सटीक और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित होगी, जिससे हर व्यक्ति और हर घर को उचित रूप से दर्ज किया जाएगा।

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