कानपुर में एक बड़े अवैध किडनी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने जानकारी दी कि यह गैंग गरीब और जरूरतमंद लोगों से किडनी खरीद कर उन्हें भारी कीमत में बेचता था। आरोपियों ने उत्तराखंड के एक युवक से मात्र 10 लाख रुपये में किडनी खरीदी और फिर उसे बिहार की एक महिला को 90 लाख रुपये में बेचा। इस पूरे रैकेट में कई लोग शामिल थे, जो डोनर और रिसीवर के बीच मध्यस्थ का काम कर रहे थे। पुलिस ने गैंग के सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी भी शुरू कर दी है।
गरीब डोनर की जिंदगी से खिलवाड़
इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि डोनर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर था। उसे किडनी बेचने के लिए सिर्फ 10 लाख रुपये दिए गए जबकि मरीज से इसके लिए 90 लाख रुपये वसूले गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डोनर को यह भरोसा दिलाया गया कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी और सुरक्षित है। गैंग के सदस्य उसे अस्पताल ले गए और वहां डॉक्टरों की मदद से किडनी निकालवाई गई। डोनर और उसकी परिवार की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी गैंग ने नहीं ली, जिससे यह एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बन गया।
बिहार में किडनी बेचने की कहानी
किडनी खरीदने के बाद, गैंग ने इसे बिहार की एक महिला मरीज को बेचा। यह महिला गंभीर बीमारी से ग्रस्त थी और डॉक्टरों ने उसे किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। गैंग ने इस मामले में भारी रकम वसूली और कागजी प्रक्रिया को छुपाकर लेन-देन किया। पुलिस ने बताया कि ऐसे रैकेट कई सालों से काम कर रहे थे और कानपुर, उत्तराखंड और बिहार को जोड़कर मानव अंगों की तस्करी कर रहे थे। यह खुलासा एक इंटेलिजेंस इनपुट के बाद हुआ, जिससे पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
कानपुर पुलिस ने इस पूरे रैकेट के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस ने बताया कि अब तक गैंग के कई सक्रिय सदस्य हिरासत में हैं और उनके साथ जुड़े अस्पताल और डॉक्टरों की जांच भी की जा रही है। प्रशासन ने कहा कि ऐसे अपराध मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी। पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अंग बिक्री या खरीद के मामलों में सतर्क रहें और सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
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