Home देश सुप्रीम कोर्ट में अचानक बढ़े 4 नए पद! राष्ट्रपति मुर्मू के फैसले...

सुप्रीम कोर्ट में अचानक बढ़े 4 नए पद! राष्ट्रपति मुर्मू के फैसले से न्याय व्यवस्था में क्या बदलने वाला है?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने वाले अध्यादेश को मंजूरी दी। जानिए सरकार ने यह बड़ा फैसला क्यों लिया और इससे न्याय व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।

देश की सर्वोच्च अदालत में बढ़ते मामलों के दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। इस संख्या में भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल नहीं होंगे। सरकार का मानना है कि इससे अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई तेज होगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा। लंबे समय से सुप्रीम Court में लाखों मामलों का बोझ बढ़ता जा रहा था, जिसे देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

लंबित मामलों के बोझ को कम करने की तैयारी

देश की न्याय व्यवस्था में तेजी लाने के उद्देश्य से लाया गया यह अध्यादेश ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ के तहत जारी किया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ते मामलों और सुनवाई में हो रही देरी को देखते हुए अतिरिक्त जजों की जरूरत महसूस की जा रही थी। नए जजों की नियुक्ति होने के बाद अलग-अलग बेंचों में ज्यादा मामलों की सुनवाई संभव हो सकेगी। इससे वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। कानूनी विशेषज्ञ भी इसे न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दी जानकारी

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Arjun Ram Meghwal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956’ में संशोधन को मंजूरी देते हुए अध्यादेश जारी कर दिया है। सरकार का कहना है कि अदालतों में मामलों की बढ़ती संख्या के कारण न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। ऐसे में जजों की संख्या बढ़ाना जरूरी हो गया था ताकि आम लोगों को समय पर न्याय मिल सके। सरकार का यह भी दावा है कि इससे न्यायपालिका की कार्यक्षमता और बेहतर होगी।

मोदी कैबिनेट की मंजूरी के बाद आया अध्यादेश

यह फैसला केंद्र सरकार की उस कैबिनेट बैठक के बाद आया है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री Narendra Modi ने की थी। 5 मई को हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों के पद बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ को संसद में लाने की तैयारी की गई। हालांकि संसद सत्र से पहले ही सरकार अध्यादेश का रास्ता लेकर आई। भारत में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या तय करने के लिए पहला कानून वर्ष 1956 में बनाया गया था। तब से लेकर अब तक समय-समय पर अदालतों के बढ़ते कामकाज के अनुसार जजों की संख्या में बदलाव किए जाते रहे हैं। अब नए संशोधन के बाद उम्मीद की जा रही है कि देश की सर्वोच्च अदालत में न्याय प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और प्रभावी बनेगी।

Read more-दिल्ली की प्रेस ब्रीफिंग में आखिर क्यों भड़क उठे रूस के विदेश मंत्री? एक फोन कॉल ने बढ़ा दिया तनाव

Exit mobile version