ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अब अफ्रीका में एक बड़ा आतंक विरोधी अभियान चलाने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिकी सेना और नाइजीरिया की सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त ऑपरेशन में ISIS के बड़े कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी को मार गिराया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए बताया कि यह मिशन कई महीनों की गुप्त तैयारी और खुफिया जानकारी के आधार पर पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि अल-मिनुकी लंबे समय से अफ्रीका में छिपकर आतंकवादी नेटवर्क को संचालित कर रहा था और दुनिया के कई हिस्सों में हमलों की योजना बनाने में उसकी अहम भूमिका थी। अमेरिकी प्रशासन इसे ISIS के खिलाफ बड़ी सफलता मान रहा है।
ट्रंप बोले- दुनिया को डराने वाला आतंकी अब खत्म
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अल-मिनुकी को भरोसा था कि वह अफ्रीका के दूरदराज इलाकों में छिपकर बच जाएगा, लेकिन अमेरिकी एजेंसियां लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं। ट्रंप ने दावा किया कि यह आतंकी न केवल अफ्रीका बल्कि पश्चिमी देशों के खिलाफ भी हमलों की रणनीति तैयार कर रहा था। उन्होंने कहा कि अब वह निर्दोष लोगों में डर फैलाने या अमेरिकियों को निशाना बनाने की साजिश नहीं कर पाएगा। ट्रंप ने अमेरिकी सैनिकों की तारीफ करते हुए कहा कि सेना ने बेहद कठिन परिस्थितियों में ऑपरेशन को अंजाम दिया। साथ ही उन्होंने नाइजीरिया सरकार और वहां की सेना को सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
ईरान तनाव के बीच अमेरिका की नई रणनीति पर चर्चा
यह ऑपरेशन ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों और बयानबाजी ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ाई है। इसी बीच ट्रंप का चीन दौरा भी काफी चर्चा में रहा। दो दिन के दौरे में उन्होंने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत की। माना जा रहा है कि अमेरिका चाहता है कि चीन, ईरान पर दबाव बनाए ताकि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को रोका जा सके। चीन और ईरान के करीबी संबंधों को देखते हुए यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब एक साथ कई मोर्चों पर अपनी रणनीति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और मिडिल ईस्ट में प्रभाव बनाए रखना शामिल है।
ISIS नेटवर्क को बड़ा झटका, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं
अमेरिका के दावे के बाद सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को ISIS के लिए बड़ा नुकसान मान रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में संगठन कमजोर जरूर पड़ा है, लेकिन अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के कुछ इलाकों में उसके नेटवर्क अब भी सक्रिय बताए जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़े कमांडरों के मारे जाने से आतंकी संगठनों की कमान कमजोर पड़ती है, लेकिन उनके छोटे मॉड्यूल फिर भी खतरा बने रहते हैं। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार निगरानी और सैन्य अभियान चला रहे हैं। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन इस ऑपरेशन को अपनी मजबूत सुरक्षा नीति की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में छिपे आतंकियों को छोड़ा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में इस ऑपरेशन को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है, क्योंकि फिलहाल अमेरिकी एजेंसियों ने मिशन के कई पहलुओं को गोपनीय रखा है।