Lucknow News: उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ में सहारा शहर की जमीन पर नया विधानसभा कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना पर काम कर रही है। इस परियोजना में नया विधानसभा भवन, सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास और कई सरकारी दफ्तर बनाए जाने हैं। इसके लिए करीब 245 एकड़ जमीन तय की गई है। सरकार की ओर से इस योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई थी, लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इससे परियोजना को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और एलडीए से मांगा जवाब
सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि जमीन को लेकर उसकी बात पूरी तरह नहीं सुनी गई। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और लखनऊ नगर निगम को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों को 31 जुलाई 2026 तक अपना जवाब देने का निर्देश दिया है। अब आगे की कार्रवाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगी।
जमीन को लेकर क्या है पूरा विवाद?
सहारा शहर की करीब 170 एकड़ जमीन साल 1994 में नगर निगम ने लीज पर दी थी। इस जमीन पर आवासीय परियोजना बनाने की शर्त रखी गई थी। नगर निगम का आरोप है कि समय के साथ लीज की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर साल 2025 में लीज रद्द कर दी गई और जमीन का कब्जा नगर निगम ने अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद सहारा समूह अदालत पहुंचा, लेकिन हाईकोर्ट से उसे राहत नहीं मिली। बाद में कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अब कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर
सरकार इस जमीन पर बड़ा प्रशासनिक परिसर बनाना चाहती है और इसके लिए शुरुआती प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद अब इस परियोजना का भविष्य अदालत के फैसले पर निर्भर हो गया है। यदि कोर्ट में सरकार के पक्ष में फैसला आता है तो निर्माण कार्य आगे बढ़ सकता है। वहीं यदि सहारा समूह को राहत मिलती है तो परियोजना की दिशा बदल सकती है। फिलहाल सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर बनी हुई है।
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