पटना के चर्चित शिक्षक और खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान, जिन्हें छात्र खान सर के नाम से जानते हैं, एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कोचिंग विवाद और फायरिंग मामले में नाम सामने आने के बाद उन्होंने पटना सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद यह कदम उठाया गया है। मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा चल रही थी और गिरफ्तारी की अटकलें भी लगाई जा रही थीं। ऐसे में अब खान सर ने कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत से राहत की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद छात्रों और उनके समर्थकों की नजर भी कोर्ट की कार्यवाही पर बनी हुई है।
फायरिंग के दावे के बाद जांच में आया नया मोड़
इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब खान सर की ओर से दावा किया गया कि उनके संस्थान के बाहर फायरिंग की घटना हुई थी। इस दावे के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे वीडियो मिले, जिन्होंने मामले को नया मोड़ दे दिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, एक वीडियो में दो सुरक्षाकर्मी हथियार के साथ दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। बताया जा रहा है कि ये दोनों सुरक्षाकर्मी खान सर के संस्थान से जुड़े हुए थे। इसी के बाद मामले में कई नए सवाल खड़े हो गए और पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।
कोचिंग संस्थान में हुई थी तोड़फोड़ और हंगामे की घटना
जानकारी के अनुसार, यह मामला पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित खान ग्लोबल स्टडीज परिसर से जुड़ा है। संस्थान की ओर से आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग जबरन परिसर में घुस आए थे और वहां तोड़फोड़ की थी। इसके साथ ही सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए थे। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी और पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े थे। खान सर ने उस समय इसे एक सुनियोजित हमला बताया था। वहीं दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को गलत बताते हुए खुद को निर्दोष बताया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
अब कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं सबकी नजरें
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू खान सर की अग्रिम जमानत याचिका है। माना जा रहा है कि अदालत जल्द ही इस पर सुनवाई कर सकती है। यदि कोर्ट उन्हें राहत देता है तो गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक लग सकती है, जबकि याचिका खारिज होने की स्थिति में उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर पुलिस भी जांच जारी रखे हुए है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा जगत और बिहार की स्थानीय राजनीति में भी चर्चा को जन्म दिया है। अब सभी की निगाहें अदालत के अगले फैसले और पुलिस जांच की दिशा पर टिकी हुई हैं।
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