सीजेपी (CJP) आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से विदेशी फंडिंग से जुड़े कई दावे तेजी से वायरल हो रहे थे। इन दावों में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के नाम से कुछ कथित बयान भी साझा किए जा रहे थे। अब विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वायरल पोस्ट भ्रामक है और उसमें प्रवक्ता के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जो बातें उनके नाम से जोड़ी गईं, वे आधिकारिक बयान का हिस्सा नहीं थीं। इसके साथ ही लोगों से अपील की गई कि किसी भी संवेदनशील मामले में केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
प्रेस ब्रीफिंग के बयान को गलत संदर्भ में किया गया इस्तेमाल
विदेश मंत्रालय के अनुसार यह विवाद उस मीडिया ब्रीफिंग के बाद शुरू हुआ, जिसमें प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से सीजेपी आंदोलन से जुड़े कुछ सवाल पूछे गए थे। मंत्रालय का कहना है कि उस प्रेस वार्ता में दिए गए जवाब को बाद में सोशल मीडिया पर अलग संदर्भ में पेश किया गया। फैक्ट चेक यूनिट ने कहा कि वायरल पोस्ट में ऐसे शब्द और दावे जोड़ दिए गए, जो प्रवक्ता ने कभी नहीं कहे थे। इसी वजह से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। मंत्रालय ने दोहराया कि किसी भी आधिकारिक बयान को उसके पूरे संदर्भ के साथ ही देखा और साझा किया जाना चाहिए, ताकि गलत जानकारी फैलने से बचा जा सके।
मंत्रालय ने बताया क्या था आधिकारिक जवाब
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उस समय प्रवक्ता से विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों के बारे में सवाल पूछा गया था। इस पर उनका आधिकारिक जवाब केवल इतना था कि उस समय इस मामले में साझा करने के लिए उनके पास कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी। मंत्रालय ने कहा कि वायरल पोस्ट में इस जवाब को बदलकर ऐसे प्रस्तुत किया गया, मानो प्रवक्ता ने विदेशी फंडिंग को लेकर कोई स्पष्ट निष्कर्ष या पुष्टि कर दी हो। फैक्ट चेक यूनिट ने कहा कि ऐसा दावा पूरी तरह गलत है और यह आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। मंत्रालय ने लोगों से अपील की कि किसी भी बयान को साझा करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि अवश्य करें।
अफवाहों से बचने की सलाह, आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली अधूरी या गलत जानकारी लोगों को भ्रमित कर सकती है। इसलिए किसी भी संवेदनशील विषय पर निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक बयान और विश्वसनीय स्रोतों की जांच करना जरूरी है। सीजेपी आंदोलन से जुड़े विभिन्न दावों और चर्चाओं के बीच मंत्रालय ने साफ किया है कि उसके प्रवक्ता के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था। अब इस स्पष्टीकरण के बाद विदेशी फंडिंग से जुड़े वायरल पोस्ट पर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली जानकारी की सत्यता जांचना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
Read more-समंदर की गहराई में करण ने किया ऐसा इशारा, तेजस्वी प्रकाश भी रह गई हैरान, वीडियो हो गया वायरल
