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बुआ ने छोड़ा साथ तो भतीजे को मिला नया ठिकाना? आकाश आनंद के सामने किस पार्टी ने रखा ऑफर

Mayawati द्वारा आकाश आनंद को बसपा से निकालने के बाद उनकी अगली राजनीतिक चाल पर सवाल उठ रहे हैं। सपा ने विचारधारा से जुड़ने का ऑफर दिया है, जबकि एनडीए का रास्ता भी चर्चा में है।

Akash Anand

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा को लेकर एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand) को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब आकाश आनंद (Akash Anand) की अगली राजनीतिक चाल क्या होगी। उनके सामने बसपा से दूरी बनाए रखने, किसी दूसरी पार्टी का रुख करने या भविष्य में अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने जैसे विकल्प दिखाई दे रहे हैं। हालांकि फिलहाल उनके अगले कदम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सपा ने दिया साथ आने का संकेत

आकाश आनंद (Akash Anand) के निष्कासन के बीच समाजवादी पार्टी की ओर से उन्हें अपनी विचारधारा से जुड़ने का खुला संकेत मिला है। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि अगर आकाश आनंद (Akash Anand)  समाजवादी विचारधारा के साथ आना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल नाम या बयान से नहीं, बल्कि नीतियों और जमीन पर काम के आधार पर ही किसी को पार्टी में जगह मिल सकती है। ऐसे में सपा का यह बयान आने वाले दिनों में आकाश आनंद की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चाओं को और तेज कर सकता है।

बीजेपी-एनडीए की ओर भी बढ़ सकता है रास्ता?

सपा से पहले निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद भी आकाश आनंद को एनडीए के साथ आने का न्योता दे चुके हैं। हालांकि उनके बयान को बसपा की मौजूदा स्थिति पर राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर भी देखा गया। दूसरी ओर वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला का मानना है कि आकाश आनंद (Akash Anand) और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान अभी सीमित है और दोनों की पहचान मुख्य रूप से मायावती और बसपा से जुड़ी रही है। ऐसे में आकाश के लिए तुरंत किसी दूसरी पार्टी में जाना कितना आसान होगा, यह बड़ा सवाल है।

क्या आकाश आनंद शुरू करेंगे नई सियासी पारी?

आकाश आनंद (Akash Anand) को लेकर यह चर्चा भी है कि वह भविष्य में अपनी अलग राजनीतिक राह चुन सकते हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। ज्ञानेंद्र शुक्ला ने यह संभावना भी जताई कि अशोक सिद्धार्थ के किसी दूसरी राजनीतिक ताकत के संपर्क में होने की जानकारी से मायावती की नाराजगी बढ़ी हो सकती है। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने भी पूरे घटनाक्रम पर मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि आकाश आनंद (Akash Anand) को बाहर से किसी राजनीतिक विरोधी की जरूरत नहीं है। अब नजर इस बात पर है कि मायावती के फैसले के बाद आकाश आनंद चुप रहेंगे या 2027 से पहले कोई बड़ा सियासी कदम उठाएंगे।

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