लद्दाख के राजनीतिक भविष्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की सब-कमेटी के बीच बातचीत हुई। करीब चार महीने बाद हुई इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद थी कि सरकार लद्दाख के लिए प्रस्तावित राजनीतिक व्यवस्था का लिखित मसौदा पेश करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बैठक के बाद निराशा जताते हुए कहा कि उन्हें सवालों की एक सूची दी गई और इन मुद्दों पर अगली बैठक में चर्चा करने की बात कही गई। उनके मुताबिक विधानसभा, परिसीमन और चुनाव जैसे मुद्दों पर पहले भी बातचीत हो चुकी है।
विधानसभा चुनाव जल्द कराने की मांग पर जोर
बैठक के दौरान अगली बातचीत अक्टूबर के पहले सप्ताह में कारगिल में करने का प्रस्ताव सामने आया है। सोनम वांगचुक ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की सबसे बड़ी मांग लद्दाख में जल्द चुनी हुई विधानसभा बनाना है। उनका कहना है कि इससे जुड़ा प्रस्ताव संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में लाया जाना चाहिए, ताकि चुनाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। वांगचुक के मुताबिक अगर प्रक्रिया जल्द शुरू होती है तो लगभग एक साल में लद्दाख में निर्वाचित विधानसभा का गठन संभव हो सकता है। LAB और KDA चाहते हैं कि स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र से जुड़े बड़े फैसलों में सीधे भागीदारी मिले।
आंदोलन से जुड़े मामलों की एक साथ वापसी की मांग
बैठक में एक सकारात्मक पहलू मुआवजे को लेकर सामने आया। वांगचुक के अनुसार 24 सितंबर 2025 की घटनाओं में मारे गए और घायल हुए लोगों के लिए मुआवजे को मंजूरी मिलने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। इसकी घोषणा जल्द किए जाने की बात कही गई। हालांकि आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने पर अभी पूरी सहमति नहीं बनी है। सरकार की ओर से मामलों को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने का विकल्प बताया गया, लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने इसे स्वीकार नहीं किया। वांगचुक ने कहा कि उनकी मांग सभी मामलों को एक साथ वापस लेने की है। इस मांग पर सरकार ने विचार करने का आश्वासन दिया है।
बड़े फैसलों पर रोक नहीं लगी तो आंदोलन का रास्ता खुला
LAB और KDA ने मांग की है कि जब तक लद्दाख में चुनी हुई लोकतांत्रिक संस्था नहीं बन जाती, तब तक क्षेत्र के स्वरूप, भूमि या प्रशासनिक व्यवस्था पर असर डालने वाला कोई बड़ा फैसला न लिया जाए। वांगचुक के मुताबिक यह मांग सरकार के सामने लिखित रूप में रखी गई है। उन्होंने कहा कि अगर लद्दाख की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया और बड़े फैसले लिए गए तो आंदोलन का रास्ता अपनाने की स्थिति बन सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल फिलहाल आंदोलन नहीं चाहता और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की उम्मीद कर रहा है। अब अक्टूबर में होने वाली अगली बैठक पर नजर रहेगी, जहां लद्दाख के लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव सामने आने की उम्मीद है।
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