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शी जिनपिंग आ रहे भारत, मोदी से मुलाकात में खुलेगा कौन सा बड़ा राज? इन मुद्दों पर नजर

BRICS Summit 2026 में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर नजर है। जानें LAC, व्यापार और रेयर अर्थ मिनरल्स पर क्या हो सकता है बड़ा फैसला।

BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS Summit 2026 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं की बैठक 12 सितंबर को हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो 2020 के गलवान संघर्ष के बाद यह दोनों नेताओं की पहली औपचारिक आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत होगी। भारत इस बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में किया जा रहा है। शी जिनपिंग का प्रस्तावित दौरा करीब सात साल बाद भारत यात्रा के तौर पर भी अहम माना जा रहा है।

गलवान के बाद रिश्तों में आया था बड़ा तनाव

2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में काफी तनाव पैदा हो गया था। सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं की तैनाती बढ़ी और कई क्षेत्रों में आर्थिक रिश्तों को लेकर भी भारत ने सावधानी बढ़ाई। हालांकि पिछले कुछ समय से दोनों देश सीमा पर तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच लगातार चर्चा हुई है। इसके बावजूद भारत-चीन संबंधों में भरोसे की कमी अभी भी बड़ी चुनौती मानी जाती है। ऐसे में मोदी और शी की मुलाकात दोनों देशों के बीच रिश्तों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

LAC से व्यापार तक, किन मुद्दों पर होगी बात?

बैठक में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सीधी उड़ानों और आर्थिक सहयोग को लेकर भी चर्चा की संभावना है। भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत चल रही है। ऐसे में दोनों नेताओं की सीधी बातचीत से आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद की जा रही है। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर अंतिम सहमति बनेगी, इसका आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

रेयर मिनरल पर बन सकता है बड़ा गेमचेंजर समझौता

मोदी-शी मुलाकात में रेयर अर्थ मिनरल्स का मुद्दा भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। इन दुर्लभ खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रक्षा तकनीक, पवन ऊर्जा और कई आधुनिक उद्योगों में होता है। चीन इस क्षेत्र की वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका रखता है, जबकि भारत को अपनी जरूरतों के लिए चीनी सप्लाई पर निर्भर रहना पड़ा है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच रेयर मिनरल्स की आपूर्ति को लेकर कोई सहमति बनती है तो इसका सीधा असर भारत के उद्योगों पर पड़ सकता है। हालांकि 12 सितंबर की बैठक में किसी समझौते पर हस्ताक्षर की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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