समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Azam Khan को शत्रु संपत्ति मामले में बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने इस मामले में उनकी जमानत मंजूर कर ली है। लंबे समय से कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे आजम खान के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। हालांकि, वह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे क्योंकि दो पैन कार्ड मामले में उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई जा चुकी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है और सपा समर्थकों के बीच इसे बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में दर्ज हुआ था केस
यह मामला साल 2020 में दर्ज किया गया था। आरोप है कि शत्रु संपत्ति से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को खुर्द-बुर्द करने और दस्तावेजों में गड़बड़ी करने की कोशिश की गई थी। इसी मामले में पुलिस ने जांच के दौरान कई गंभीर धाराएं जोड़ी थीं। बाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी यानी आपराधिक साजिश के तहत भी आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम का नाम शामिल किया गया। जांच एजेंसियों का दावा था कि रिकॉर्ड में बदलाव कर संपत्ति से जुड़े तथ्यों को प्रभावित करने का प्रयास हुआ था। इस केस के चलते आजम खान की कानूनी परेशानियां लगातार बढ़ती चली गईं और उन्हें कई बार अदालतों के चक्कर लगाने पड़े।
दो पैन कार्ड मामले में पहले ही हो चुकी है सजा
हालांकि शत्रु संपत्ति मामले में जमानत मिलने के बावजूद आजम खान की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। फिलहाल वह रामपुर जेल में बंद हैं। दो पैन कार्ड रखने के मामले में अदालत ने उन्हें और अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसी वजह से दोनों अभी जेल में ही रहेंगे। इस मामले में अदालत ने चुनावी दस्तावेजों और पहचान संबंधी रिकॉर्ड में विसंगतियों को गंभीर माना था। सजा के बाद आजम खान की विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार चल रहे मुकदमों ने सपा के इस बड़े मुस्लिम चेहरे की सक्रिय राजनीति पर बड़ा असर डाला है।
सियासी गलियारों में फिर तेज हुई चर्चा
आजम खान को जमानत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उनकी वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सपा नेताओं का कहना है कि उनके खिलाफ कई मामलों में राजनीतिक द्वेष के तहत कार्रवाई की गई। वहीं विपक्षी दल इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं। रामपुर की राजनीति में आजम खान का प्रभाव लंबे समय से रहा है और उनके समर्थक अब भी उन्हें बड़ा जननेता मानते हैं। आने वाले दिनों में यदि अन्य मामलों में भी राहत मिलती है तो सपा के लिए यह राजनीतिक रूप से अहम साबित हो सकता है। फिलहाल कोर्ट के इस फैसले ने आजम खान के परिवार और समर्थकों को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही।
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