उत्तर प्रदेश सरकार में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा मंत्रियों के विभागों को लेकर हो रही है। सत्ता के गलियारों में लगातार बैठकों और मंथन का दौर जारी है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री जल्द ही मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर सकते हैं। इसी बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और वरिष्ठ नेता मनोज पांडेय के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। सूत्रों की मानें तो दोनों नेताओं को सरकार में बेहद अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं राज्यमंत्री से प्रमोट हुए डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर और अजीत पाल सिंह को भी मजबूत विभाग दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। कैबिनेट विस्तार के बाद राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए विभागों में बड़ा फेरबदल होने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में भाजपा संगठन से लेकर विपक्ष तक की नजरें योगी सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।
PWD विभाग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
सरकार के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा लोक निर्माण विभाग यानी PWD को लेकर हो रही है। यह विभाग पहले जितिन प्रसाद के पास था, लेकिन उनके केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने के बाद यह जिम्मेदारी फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है। अब माना जा रहा है कि इस विभाग को किसी बड़े और भरोसेमंद चेहरे को सौंपा जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में भूपेंद्र चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। भूपेंद्र चौधरी इससे पहले भी PWD की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा पंचायती राज विभाग में भी उनका अनुभव सरकार के लिए उपयोगी माना जा रहा है। अगर उन्हें PWD की जिम्मेदारी मिलती है तो यह सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल का संकेत भी माना जाएगा। वहीं मनोज पांडेय को भी किसी प्रभावशाली मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें तेज हैं।
AK शर्मा के विभागों पर भी सस्पेंस बरकरार
ऊर्जा और नगर विकास जैसे बड़े विभाग फिलहाल ए.के. शर्मा के पास हैं, लेकिन इन विभागों को लेकर भी सियासी हलचल बनी हुई है। खासतौर पर स्मार्ट मीटर, बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमला बोलता रहा है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर भी ऊर्जा विभाग के कामकाज को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सरकार इन विभागों में बदलाव कर सकती है। हालांकि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर ही होगा। अगर ऊर्जा विभाग में बदलाव होता है तो यह योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक संदेश माना जाएगा। वहीं नगर विकास विभाग को लेकर भी कई नाम चर्चा में हैं। सरकार की कोशिश है कि आगामी चुनावों से पहले जनता से जुड़े विभागों में ऐसे चेहरे लाए जाएं जिनकी पकड़ मजबूत हो और जिनकी छवि बेहतर प्रशासन देने वाली हो।
कई मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा तेज
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि केवल नए मंत्रियों को विभाग देने तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई पुराने मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि मंत्रिमंडल के भीतर बेचैनी और उत्सुकता दोनों बनी हुई हैं। भाजपा नेतृत्व आने वाले चुनावी समीकरणों और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभागों का बंटवारा कर सकता है। यही कारण है कि इस बार विभागों की घोषणा को बेहद अहम माना जा रहा है। शाम तक विभागों के एलान की संभावना जताई जा रही है, जिसके बाद कई बड़े चेहरों की राजनीतिक ताकत और प्रभाव का अंदाजा भी साफ हो जाएगा। फिलहाल लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में सिर्फ एक ही चर्चा है कि आखिर योगी सरकार किसे कौन सा विभाग देकर बड़ा संदेश देने वाली है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
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