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‘सम्मान आदेश’ पर अखिलेश यादव ने BJP पर साधा निशाना, कहा ‘इज्जत फरमान से नहीं अच्छे काम से…’

योगी सरकार के जनप्रतिनिधि सम्मान आदेश पर अखिलेश यादव का तंज, कहा— इज्जत फरमान से नहीं मिलती। जानिए पूरा विवाद और सरकारी निर्देश।

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से सभी प्रशासनिक अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे सांसदों और विधायकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करें। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के साथ शिष्टाचार बनाए रखा जाए और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए। इसी निर्देश के सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

अखिलेश यादव का तंज— “फरमान से नहीं मिलता सम्मान”

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस आदेश पर कड़ा तंज कसा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने ही सांसदों और विधायकों का सम्मान अब आदेश जारी कराकर मांग रही है। उन्होंने लिखा कि “इज्जत कभी फरमान से नहीं मिलती, बल्कि अच्छे कामों और व्यवहार से मिलती है।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है और सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है।

आदेश में अधिकारियों के लिए सख्त नियम

मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि यदि कोई सांसद या विधायक किसी अधिकारी के कार्यालय में पहुंचता है, तो अधिकारी को खड़े होकर उनका अभिवादन करना होगा। इसके साथ ही अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के फोन कॉल का जवाब देना अनिवार्य किया गया है। यदि वे व्यस्त हों तो बाद में कॉल बैक करना होगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान किया जाए और इसकी जानकारी भी उन्हें दी जाए। नियमों का पालन न करने पर राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

अफसर-नेताओं के बीच तनाव की पुरानी शिकायतें

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि कई अधिकारी सांसदों और विधायकों की बातों को गंभीरता से नहीं लेते या फोन कॉल का जवाब नहीं देते। कई जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके प्रस्ताव और समस्याओं को अनदेखा किया जाता है। इसी स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने यह नया निर्देश जारी किया है, जिसे प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है और इसे लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

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