प्रयागराज के संगम तट पर इन दिनों चल रहे माघ मेले में अध्यात्म, भक्ति और आस्था का संगम देखने को मिल रहा है। साधु-संतों की अलग-अलग छवियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं, लेकिन इसी बीच एक ऐसी उपस्थिति ने सबका ध्यान खींच लिया, जिसने श्रद्धालुओं को ठहरकर सोचने पर मजबूर कर दिया। श्रृंगवेरपुर धाम से आए महज छह साल के बाल राम श्रीश बाहुबली महाराज माघ मेले में भगवान राम के बाल रूप में दर्शन दे रहे हैं। माथे पर चमकता तिलक, राम रूपी वेशभूषा और मुख से निकलते संस्कृत श्लोक—इन सबने संगम की रेती पर मौजूद लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इतनी छोटी उम्र में गीता के श्लोक, भक्ति गीत और सनातन पर गहरी बातें सुनकर हर कोई हैरान नजर आया।
छोटी उम्र, लेकिन विचार बेहद विराट
बाल राम श्रीश बाहुबली महाराज सिर्फ वेशभूषा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके विचार और वाणी उन्हें खास बनाते हैं। माघ मेले में उन्होंने कहा कि भारत आने वाले समय में विश्व गुरु बनेगा और सनातन संस्कृति का मान-सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ेगा। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी बातें केवल भाषण के रूप में नहीं, बल्कि भक्ति गीतों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाईं। उनके गीतों में राष्ट्र, संस्कृति और अध्यात्म की झलक साफ दिखाई दी। मौजूद श्रद्धालुओं का कहना है कि इतनी कम उम्र में आत्मविश्वास के साथ मंच पर बोलना और गीत गाना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। बाल राम को सुनते समय ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई अनुभवी संत अपनी अनुभूतियां साझा कर रहा हो।
संत प्रेमानंद महाराज से लेकर सीएम योगी तक चर्चा में रहे श्रीश
श्रीश बाहुबली महाराज इससे पहले भी कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं। संत प्रेमानंद महाराज पर की गई टिप्पणी के बाद उन्होंने खुलकर उनके समर्थन में आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा था कि प्रेमानंद महाराज राधा नाम का जप करते हैं और उसी कृपा से गंभीर बीमारी के बावजूद जीवित हैं। यही नहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंच पर बाल राम श्रीश महाराज ने शिव तांडव स्तोत्र का पाठ किया था, जिसे सुनकर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा था। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं उन्हें सम्मानित भी किया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ और तभी से श्रीश महाराज लोगों की आस्था का केंद्र बनते चले गए।
श्रृंगवेरपुर धाम और राम से जुड़ा गहरा इतिहास
जिस श्रृंगवेरपुर धाम से बाल राम श्रीश बाहुबली महाराज आए हैं, उसका भगवान राम से गहरा ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध रहा है। मान्यता है कि राजा दशरथ ने यहीं पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था और निषादराज, जो भगवान राम के बाल सखा थे, इसी भूमि के निवासी थे। यही वह स्थान है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने राजसी जीवन का त्याग कर वनवासी जीवन की शुरुआत की थी। केवट ने भी यहीं से भगवान राम को गंगा पार कराई थी। वर्ष 2024 में अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी श्रीश महाराज भगवान राम के बाल रूप में दर्शन देने पहुंचे थे। उम्र भले ही छह साल हो, लेकिन सवालों के जवाब देने का उनका अंदाज और आत्मविश्वास देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।